MahaKumbh 2025 : आधा भारत लगा चुका है संगम में डुबकी!

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maha kumbh 2025

संगम तट की तस्वीर

MahaKumbh 2025 : आधी आबादी की सहभागिता से प्रयागराज महाकुंभ नया इतिहास रच रहा है. देश की 50 फीसदी के आगमन की ओर मेला बढ़ रहा है.

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MahaKumbh 2025 : प्रयागराज महाकुंभ इतिहास रचने के करीब है. देश की 50 फीसदी के आगमन की तरफ आगे बढ़ रहे महाकुंभ ने समाज के सभी वर्गों की भागीदारी हुई है. प्रयागराज महाकुंभ में पहुंचने वालों की संख्या 55 करोड़ को भी पार कर गई है. देश की लगभग आधी आबादी का यहां पहुंचना समाज विज्ञानियों के लिए भी एक विश्लेषण और शोध के लिए प्रेरित करता है. देश में सामाजिक व्यवस्था पर हो रहे परिवर्तन पर अध्ययन करने वाले शीर्षस्थ मंच गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के शोधार्थियों ने अपने शोध में नारी सहभागिता को लेकर जो प्रारम्भिक निष्कर्ष सामने आए हैं वह मौजूदा समाज की सोच का खाका खींच रही है.

संस्थान के निदेशक प्रो बद्री नारायण और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अर्चना सिंह के नेतृत्व में यह शोध चल रहा है. डॉ अर्चना सिंह का कहना है कि महाकुंभ के विभिन्न एंट्री पॉइंट्स और स्नान घाटों पर उनके अध्ययन दल के सदस्य मौजूद हैं जो अभी भी महा कुम्भ आने वाली आबादी के विभिन्न पहलुओं पर उनसे बातचीत कर उनके बिहेवियर और उनकी सोच को समझने का प्रयत्न कर रही है. उनका कहना है कि महाकुंभ आ रही आबादी में आधी आबादी की संख्या 40 फीसदी से अधिक है. इसके पहले के कुंभ के आयोजनों से यह संख्या अधिक है. इसमें नगरीय क्षेत्र से आने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है खासकर 18 से 35 आयु वर्ग से ,जो कई तरह के संकेत दे रही है.

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शिक्षा , सुरक्षा से मिली ताकत जगी सनातन की ललक

प्रयागराज महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं में नारी शक्ति की संख्या में इस बार अधिक बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है, लेकिन सहभागिता के साथ इसके पीछे के कारक अधिक महत्वपूर्ण हैं. शोध दल की समन्वयक डॉ अर्चना सिंह का कहना है कि इस बार महाकुंभ में विमेन ओनली ग्रुप की महिलाओं की संख्या अधिक थी जो किसी पुरुष के साथ नहीं बल्कि अकेले आई थी. इसकी वजह एक तरफ अगर उनके शिक्षा की बेहतर स्थिति है तो वहीं दूसरी तरफ खुद को अब वह अधिक सुरक्षित समझ रही है. प्रदेश में सुरक्षित वातावरण से वह घर से भी निकली है और अपने को व्यक्त भी कर रही है. अभी तक जो घर में पूजा अर्चना तक खुद को सीमित रखती थी अब वो सनातन को भी समझने के लिए आगे आई हैं.

धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं ने दी स्वीकृति

महाकुंभ अध्ययन दल की इस 17 सदस्यीय टीम के निष्कर्ष में यह भी बात सामने आई है कि अब धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं का दृष्टिकोण भी बदला है. शोध दल की सीनियर फेलो डॉ नेहा राय का कहना है कि महाकुंभ में अखाड़ों और उनके धर्माचार्यों का दृष्टिकोण भी इस बार नारी शक्ति के प्रति अधिक उदारवादी रहा है. अखाड़ों में महिला श्रद्धालुओं को सम्मान और स्वीकृति भी बढ़ी है. इससे सनातन को समझने में उनकी ललक बढ़ी है. इसी दल की शोध सदस्या डॉ प्रीति यादव का कहना है कि बहुत सी महिलाओं ने अखाड़ों के साधु संतों और धर्माचार्यों के सामने अपनी जिज्ञासा और अपने विमर्श भी दिए, जिससे साधु संतों को भी सनातन के विस्तार के लिए रास्ता बनाने में आसानी होगी.

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अमिताभ कुमार

लेखक के बारे में

By अमिताभ कुमार

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है. 📩 संपर्क : [email protected]

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