जानवरों की तरह 30 साल से बंधा था पेड़ पर, तीन दशक बाद परिवार से हुई मुलाकात, देखें VIDEO
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 28 Nov 2024 9:07 PM
Bhim Singh
Uttar Pradesh: यूपी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. एक शख्स पिछले 30 साल से जानवरों की तरह जिंदगी जी रहा था. उसे बंधुआ मजदूर की तरह समय गुजारना पड़ रहा था. तीन दशक बाद उसे परिवार से मिलने का मौका मिला.
Uttar Pradesh: राजस्थान के जैसलमेर में बंधुआ मजदूर की जिंदगी जीने वाला भीम सिंह 30 साल बाद अपने परिवार से मिला. परिवार से मिलकर भीम काफी खुश नजर आया. लेकिन उसने अपने साथ हुई हैवानियत के बारे में जो बताया, उसे सुनकर आपका दिल दहल उठेगा.
Uttar Pradesh: 30 साल पहले हुआ था नोएडा से अगवा
भीम सिंह ने बताया, “जब मैं अपनी बहन के साथ स्कूल से लौट रहा था, तो कुछ लोगों ने हमें नोएडा से अगवा कर लिया और राजस्थान के जैसलमेर ले गए”. भीम ने बताया, “मैं गांव में भेड़-बकरी पालता था. वे मुझे एक पेड़ से बांध देते थे और शाम को सिर्फ एक बार खाना देते थे. एक व्यक्ति ने मुझे इस हालत में देखा और मुझे गाजियाबाद में छोड़ दिया. फिर पुलिस स्टेशन ने मेरी मदद की और मुझे मेरे परिवार से फिर से मिला दिया”.
कुछ इस तरह पुलिस ने भीम को उसके परिवार से मिलाया
एसीपी साहिबाबाद रजनीश कुमार उपाध्याय ने कहा, “एक व्यक्ति (भीम सिंह) पुलिस स्टेशन आया और यह बताने में असमर्थ था कि वह किस क्षेत्र से है. उसकी (भीम सिंह) आपबीती सुनने के बाद, हमने एक टीम बनाई और सोशल मीडिया पर उसके बारे में जानकारी फैलाई. सोशल मीडिया के माध्यम से उसके (भीम सिंह) बारे में पता चलने के बाद, कई परिवारों ने हमसे संपर्क किया. उनमें से एक, तुला राम के परिवार ने भी हमसे संपर्क किया और उसने (भीम सिंह) तुरंत अपने परिवार के सदस्यों को पहचान लिया. उसे (भीम सिंह) उसके परिवार के सदस्यों से मिला दिया गया है. आगे की जांच चल रही है”.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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