UP News : गोरखपुर में आतंकी और रोहिंग्या भी! किराएदार बनकर रह रहे हैं इलाके में ? अलर्ट जारी
Author : संवाद न्यूज Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 Jun 2021 12:13 PM
UP News : आतंकी और रोहिंग्या को लेकर जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है. गोरखपुर और आसपास के जिलों में भी पुलिस किरायेदारों का सत्यापन कर जांच पड़ताल करेगी. गोपनीय रिपोर्ट आई है कि आतंकी और रोहिंग्या किराएदार बनकर यहां पर रह सकते हैं क्योंकि यहां से नेपाल सीमा करीब में है. एडीजी अखिल कुमार ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है.UP,Terrorists and Rohingya ,Gorakhpur, Alert issued
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नेपाल सीमा से सटे होने की वजह से किराएदार बनकर छिपने की आशंका पर एडीजी ने जारी किया आदेश
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किरायेदारों का होगा सत्यापन, पुलिस की तय की गई जिम्मेदारी
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आतंकी और रोहिंग्या को लेकर जिले में अलर्ट जारी
गोरखपुर : आतंकी और रोहिंग्या को लेकर जिले में अलर्ट जारी (Gorakhpur, Alert issued) कर दिया गया है. गोरखपुर और आसपास के जिलों में भी पुलिस किरायेदारों का सत्यापन कर जांच पड़ताल करेगी. गोपनीय रिपोर्ट आई है कि आतंकी और रोहिंग्या किराएदार बनकर यहां पर रह सकते हैं क्योंकि यहां से नेपाल सीमा करीब में है. एडीजी अखिल कुमार ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है.
जानकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में यूपी में 8 रोहिंग्याओं की गिरफ्तारी के बाद गोरखपुर जोन के सभी 11 जिलों में रोहिंग्या की तलाश शुरू हो गई है. इन्हें चिन्हित कर कार्रवाई करने के लिए गोरखपुर जोन के एडीजी अखिल कुमार ने यहां सभी तीन रेंज के डीआईजी व 11 जिलों के पुलिस कप्तानों को निर्देश जारी किया है. एडीजी अखिल कुमार ने कहा है कि अपराधियों से लेकर रोहिंगा तक विभिन्न जिलों में अपनी पहचान छिपाकर ठिकाना बदल-बदल कर रह रहे हैं. मकान मालिक भी पूरी जानकारी किए बगैर ही मकान किराए पर दे देते हैं. ऐसे में सभी जिलों में अभियान चलाकर किराए के मकानों में रह रहे लोगों का सत्यापन कराया जाए. ताकि ऐसे संदिग्धों को चिन्हित कर उनपर कार्रवाई की जा सके.
एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि जोन के 5 जिले नेपाल सीमा व 3 जिले बिहार की सीमा से जुड़े हैं. ऐसे में सीमावर्ती इलाकों में अपराधियों के साथ ही देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के प्रवेश की आशंका हमेशा बनी रहती है. इसलिए अपराध व अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए किराएदारों का सत्यापन कराना बेहद ही जरूरी है. सत्यापन के लिए पुलिस को अपराधियों की पूरी जानकारी तो मिल ही जाएगी, साथ ही उनके छिपकर रहने की संभावनाएं खत्म हो जाएगी. क्योंकि पुलिस वैरिफिकेशन से अपराधियों में भय होने लगता है. हालांकि यह भी देखा गया है कि किरायदारों का सत्यापन कराने के लिए मकान मालिक कोई खास रूचि नहीं लेते हैं। ऐसे में इन संदिग्ध अपराधियों को छिपकर रहने में सहूलियत मिल जाती.
यूपी एटीएस ने इसी साल 6 जनवरी को संतकबीरनगर जिले के समर्थन गांव में बसे रोहिंग्या अजीजुल्लाह को गिरफ्तार किया था. इसके बाद 28 फरवरी को अलीगढ़ के कमेला रोड पर रह रहे मोहम्मद फारुख और हसन को पकड़ा गया था. फारुख के भाई शाहिद को 1 मार्च को उन्नाव से दबोचा गया. शाहिद के बहनोई जुबेर के बारे में भी एटीएस को जानकारी मिली है, लेकिन वह अभी हाथ नहीं लग सका है. इतना ही नहीं, इस मामले में एटीएस की पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ था कि रोहिंग्या अजीजुल्लाह का पासपोर्ट गोरखपुर से बना था. इस मामले में एटीएस ने यहां पासपोर्ट दफ्तर के कई दलालों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की थी.
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में गिरफ्तार आतंकी का यूपी से ताल्लुक है. आशंका है कि उसका बिहार से भी संपर्क हो. हाल के वर्षों में चार बड़े आतंकी विभिन्न राज्यों से लगी नेपाल सीमा से पकड़े गए. खुफिया एजेंसियों का मानना है कि आतंकी घुसपैठ का सबसे आसान रास्ता भारत-नेपाल सीमा है. आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के लिए भारत-नेपाल सीमा सबसे मुफीद साबित हो रही है. खुफिया सूत्रों के अनुसार, नेपाल में पाकिस्तानी एंबेसी आतंकियों के छिपने और रहने का प्रबंध करती है. भारत व नेपाल के बीच उपजे ताजा सीमा विवाद व तनाव के कारण नेपाल में ये गतिविधियां बढ़ गईं हैं.
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