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World Dairy Summit 2022: पशुओं को लंपी रोग से मिलेगी मुक्ति, PM मोदी ने बताया- तैयार हो चुका देसी टीका

Updated at : 12 Sep 2022 1:22 PM (IST)
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World Dairy Summit 2022: पशुओं को लंपी रोग से मिलेगी मुक्ति, PM मोदी ने बताया- तैयार हो चुका देसी टीका

IDF World Dairy Summit 2022: पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार यानी आज इंडिया एक्स्पो सेंटर ऐंड मार्ट में विश्व डेयरी समिट का उद्घाटन कर दिया है. इस मौके पर मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला और सीएम योगी आदित्यनाथ समेत अन्य उपस्थित रहे.

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Noida News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार यानी आज इंडिया एक्स्पो सेंटर ऐंड मार्ट में विश्व डेयरी समिट का उद्घाटन कर दिया है. इस मौके पर मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला, सीएम योगी आदित्यनाथ समेत अन्य उपस्थित रहे. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि, 2014 में भारत में 146 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था. अब ये बढ़कर 210 मिलियन टन तक पहुंच गया है. यानि करीब-करीब 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

लंपी रोग की स्वदेशी वैक्सीन तैयार- पीएम मोदी

उन्होंने कहा कि, भारत में हम पशुओं के यूनिवर्सल वैक्सीनेशन पर भी बल दे रहे हैं. हमने संकल्प लिया है कि 2025 तक हम शत प्रतिशत पशुओं को फुट एंड माउथ डिजीज और ब्रुसेलोसिस की वैक्सीन लगाएंगे. हम इस दशक के अंत तक इन बीमारियों से पूरी तरह से मुक्ति का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं. पिछले कुछ समय में भारत के अनेक राज्यों में लंपी नाम की बीमारी से पशुधन की क्षति हुई है. विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र सरकार इसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है. हमारे वैज्ञानिकों ने लंपी रोग की स्वदेशी वैक्सीन भी तैयार कर ली है.

डेयरी सेक्टर से जुड़े हर पशु की हो रही टैगिंग

उन्होंने कहा कि, भारत, डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस तैयार कर रहा है. डेयरी सेक्टर से जुड़े हर पशु की टैगिंग हो रही है. आधुनिक तकनीक की मदद से हम पशुओं की बायोमीट्रिक पहचान कर रहे हैं. हमने इसे नाम दिया है- पशु आधार. भारत के डेयरी सेक्टर में महिला शक्ति 70% कार्यबल का प्रतिनिधित्व करती है. भारत के डेयरी सेक्टर की असली कर्णधार महिलाएं हैं. 2014 के बाद से हमारी सरकार ने भारत के डेयरी सेक्टर के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए निरंतर काम किया है. आज इसका परिणाम दूध उत्पादन से लेकर किसानों की बढ़ी आय में भी नजर आ रहा है.

भारत में डेयरी सहकारी का विशाल नेटवर्क- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा, विश्व के अन्य विकसित देशों से अलग, भारत में डेयरी सेक्टर की असली ताकत छोटे किसान हैं. भारत के डेयरी सेक्टर की पहचान बड़े पैमाने पर उत्पादन से ज्यादा बड़े समूह द्वारा उत्पादन की है. आज भारत में डेयरी सहकारी का एक ऐसा विशाल नेटवर्क है जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में मिलना मुश्किल है. ये डेयरी कॉपरेटिव्स देश के दो लाख से ज्यादा गांवों में करीब-करीब दो करोड़ किसानों से दिन में दो बार दूध जमा करती है और उसे ग्राहकों तक पहुंचाती है

डेयरी सेक्टर जीविका का भी प्रमुख साधन- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि, मुझे विश्वास है कि ये सम्मेलन विचार, तकनीक, विशेषज्ञता और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी परंपराओं के स्तर पर एक दूसरे की जानकारी बढ़ाने और सीखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी. डेयरी सेक्टर का सामर्थ्य ना सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देता है बल्कि ये दुनिया भर में करोड़ों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख साधन है.

पोषण और आजीविका के लिए डेयरी पर आधारित है सम्मेलन

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चार दिवसीय शिखर सम्मेलन, जो इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित किया जा रहा है, वैश्विक और भारतीय डेयरी हितधारकों का एक सम्मेलन है, जिसमें उद्योग जगत के नेता, विशेषज्ञ, किसान और नीति निर्माता भी शामिल हुए हैं.. यह सम्मेलन ‘पोषण और आजीविका के लिए डेयरी’ विषय पर केंद्रित है.

इससे पहले 1974 में हुआ था विश्व डेयरी सम्मेलन

आईडीएफ डब्ल्यूडीएस-2022 में दुनिया के 50 देशों के लगभग 1,500 प्रतिभागियों के हिस्सा लेने का अनुमान है. इससे पहले, भारत में विश्व डेयरी सम्मेलन का आयोजन साल 1974 में किया गया था. प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि, ‘भारतीय डेयरी उद्योग इस मायने में अद्वितीय है कि यह एक सहकारी मॉडल पर आधारित है, जो छोटे और सीमांत डेयरी किसानों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाता है.’

वैश्विक दुग्ध उत्पादन में लगभग 23 प्रतिशत हिस्सेदारी

पीएमओ ने कहा कि. ‘प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर सरकार ने डेयरी क्षेत्र की बेहतरी के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप पिछले आठ वर्षों में दूध उत्पादन में 44 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है.’ प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि भारतीय डेयरी उद्योग, जिसकी वैश्विक दुग्ध उत्पादन में लगभग 23 प्रतिशत हिस्सेदारी है और जो सालाना लगभग 210 मिलियन टन दूध का उत्पादन करता है और आठ करोड़ से अधिक डेयरी किसानों को सशक्त बनाता है, उसकी की सफलता की कहानी आईडीएफ डब्ल्यूडीएस-2022 में प्रदर्शित की जाएगी.

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