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दो साल से भी कम समय में कानपुर मेट्रो ट्रैक पर दौड़ने के लिए तैयार, नहीं जानते होंगे यह बातें

यूपीएमआरसी द्वारा 2 साल से भी कम समय में कानपुर मेट्रो का ट्रायल रन शुरू किया गया. इसके साथ ही टीम ने 2 साल 1 महीने एवं 15 दिन में मेट्रो की राजस्व सेवाएं शुरू करने की भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Kanpur
Updated Date
कानपुर मेट्रो
कानपुर मेट्रो
फाइल फोटो
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 दिसंबर को कानपुर मेट्रो के प्राथमिक कॉरिडोर में यात्री सेवाओं का शुभारंभ करेंगे

  • आईआईटी-कानपुर से मोतीझील तक 9 किलोमीटर लंबे प्रयोरिटी कॉरिडोर में यात्री सेवाएं होंगी शुरू

  • प्रधानमंत्री आईआईटी-कानपुर मेट्रो स्टेशन से गीता नगर मेट्रो स्टेशन तक करेंगे मेट्रो में यात्रा

  • निराला नगर स्थित रेलवे मैदान से प्रधानमंत्री कानपुर मेट्रो को दिखाएंगे हरी झंडी

  • राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी रहेंगे उपस्थित

Kanpur News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 दिसंबर को कानपुर मेट्रो के 9 किमी लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर में यात्री सेवाओं का शुभारंभ कर जनता को 'नए साल' का तोहफा देंगे. इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी मौजूद रहेंगे.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 नवंबर 2019 को कानपुर मेट्रो के सिविल निर्माण कार्य की शुरूआत की गई थी. इसके बाद दो साल के भी कम समय में 10 नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री ने दुर्गा शंकर मिश्रा, सचिव, आवास एवं शहरी कार्य की मौजूदगी में आईआईटी कानपुर से मोतीझील के बीच 9 किमी प्रायोरिटी कॉरिडोर में कानपुर मेट्रो के ट्रायल रन की शुरूआत की. इस दौरान दीपक कुमार, प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन, कुमार केशव, प्रबंध निदेशक, यूपीएमआरसी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे.

प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी 9 स्टेशनों को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) की प्लेटिनम रेटिंग से प्रमाणित किया गया है. कानपुर मेट्रो के पूरे 9 किमी के हिस्से को ग्रीन बिल्डिंग कोड के अनुसार विकसित किया गया है, जो इसे पर्यावरण के लिए सुरक्षित बनाता है. ग्रीन बिल्डिंग कोड और मापदंडों के कड़े अनुपालन के कारण, इसे पर्यावरण प्रबंधन के लिए ISO-14001 प्रमाणन और सुरक्षा प्रबंधन के लिए ISO-45001 प्रमाणन के साथ प्रमाणित किया गया है.

हाल ही में मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (सीएमआरएस) ने कानपुर मेट्रो के अपने तीन दिवसीय निरीक्षण के दौरान वाया-डक्ट, ट्रैक, स्टेशन परिसर, साइनेज, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल सुविधा आदि का निरीक्षण किया. इस निरीक्षण के तीसरे दिन सीएमआरएस ने मेट्रो ट्रेन की गति की जांच की, जो कि संतोषजनक पाई गई. सीएमआरएस का दौरा सफल रहा और कानपुर मेट्रो को प्रायोरिटी कॉरिडोर पर कॉमर्शियल रन के लिए एनओसी दी गई.

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कहा कि कोविड जैसे कठिन समय के बा्वजूद, कानपुर मेट्रो रेल परियोजना ने निर्माण कार्य की गति को तेज बनाए रखा और सभी बाधाओं और चुनौतियों को पार कर लिया. यूपीएमआरसी द्वारा 2 साल से भी कम समय में कानपुर मेट्रो का ट्रायल रन शुरू किया गया. इसके साथ ही यूपीएमआरसी की टीम 2 साल 1 महीने एवं 15 दिन में कानपुर मेट्रो की राजस्व सेवाएं शुरू करने की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने में भी सफल रही है.

कुमार केशव ने कहा, कानपुर मेट्रो तीन डिब्बों के साथ आईआईटी-कानपुर से मोतीझील तक प्राथमिकता खंड पर चलेगी. प्रधानमंत्री द्वारा संचालन के उद्घाटन के बाद जनता के लिए यात्री सेवाएं 29 दिसंबर, 2021 से खोली जाएंगी. दैनिक मेट्रो सेवाएं सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगी. शुरुआत में क्यूआर कोड से टिकट की सुविधा होगी, इसके बाद लोगों के लिए स्मार्ट कार्ड भी शुरू की जाएगी.

कुमार केशव ने कहा, "मेट्रो आवागमन का सबसे सुरक्षित तरीका है, ऐसे में कानपुर मेट्रो न केवल एक आरामदायक, सुगम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा बल्कि लोगों के हर दिन आने-जाने के तरीके को भी बदल देगा. यह निश्चित रूप से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और 'दिव्यांगजनों' को आरामदायक यात्रा अनुभव के साथ सुविधा प्रदान करेगा

कानपुर मेट्रो रेल परियोजना में 2 कॉरिडोर शामिल हैं, जिसकी कुल लंबाई 32.5 किमी है. पहला कॉरिडोर 'आईआईटी कानपुर से नौबस्ता' 23.8 किमी लंबा है, जबकि दूसरा कॉरिडोर 'चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय से बर्रा-8' 8.6 किमी लंबा है. 9 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों वाले पहले कॉरिडोर का 'आईआईटी-कानपुर से मोतीझील' का प्राथमिकता खंड अब राजस्व संचालन के लिए तैयार है.

कानपुर मेट्रो की ट्रेनें 'रीजेनरेटिव ब्रेकिंग' तकनीक से लैस होंगी, जिससे ट्रेन संचालन में 35 फीसदी तक ऊर्जा की बचत होगी. रीजेनरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली की मदद से मेट्रो ट्रेन की ब्रेकिंग प्रक्रिया के जरिए उर्जा का उत्पादन करती है, उसे वापस सिस्टम में भेज देती है. इसके जरिए कानपुर की मेट्रो ट्रेने न सिर्फ उर्जा की बचत करेंगी बल्कि इसका उत्पादन भी करेंगी.

इसके अलावा स्टेशनों और डिपो पर लगे लिफ्ट भी रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से ऊर्जा बचाने में सक्षम होंगे. इनमें 34% तक की ऊर्जा दक्षता होगी. ऊर्जा की बचत के लिए सभी मेट्रो परिसरों में 100% एलईडी लाइटिंग होगी. इसके अलावा मेट्रो डिपो और स्टेशनों पर सोलर पैनल लगाने की भी योजना तैयार की गई है.

Posted By: Achyut Kumar

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