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UPTET 2021 Paper Leak: एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा, एक माह पहले ही लीक हो चुका था पेपर

एसटीएफ ने इस मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय उपाध्याय और पेपर छापने वाली कंपनी आरएसएम फिनसर्व के डायरेक्टर राय अनूप प्रताप को गिरफ्तार करके ये खुलासा किया है कि पेपर लीक कराने में दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है. टीईटी का पेपर ट्रेजरी से नहीं बल्कि प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Lucknow
Updated Date
सांकेतिक तस्वीर.
सांकेतिक तस्वीर.
फाइल

Lucknow News: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2021 का पेपर लीक करने में अहम रोल अदा किया था परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय उपाध्याय ने. उनका साथ दिया था पेपर छापने वाली कंपनी आरएसएम फिनसर्व के डायरेक्टर राय अनूप प्रताप ने. एसटीएफ ने खुलासा किया है कि यह पेपर करीब एक माह पहले ही लीक किया जा चुका था.

UPTET 2021 की परीक्षा का पेपर लीक करने के मामले की जांच कर रही एसटीएफ ने एक बड़ा खुलासा किया है. एसटीएफ ने अपनी जांच में पाया है कि इस अतिमहत्वपूर्ण परीक्षा का पेपर एक माह पहले ही लीक किया जा चुका था.

एसटीएफ ने इस मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय उपाध्याय और पेपर छापने वाली कंपनी आरएसएम फिनसर्व के डायरेक्टर राय अनूप प्रताप को गिरफ्तार करके ये खुलासा किया है कि पेपर लीक कराने में दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है. टीईटी का पेपर ट्रेजरी से नहीं बल्कि प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था.

नकलमाफिया के पास रविवार को होने वाली टीईटी परीक्षा का पेपर करीब एक महीने पहले ही पहुंच चुका था. चूंकि, एसटीएफ के पास पेपर की कॉपी नहीं थी. इसलिए कार्रवाई करने के बजाए नकल माफिया के हर कदम पर नजर रखी जा रही थी. एसटीएफ ने एहतियातन कुछ लोगों को पहले ही हिरासत में ले लिया था.

परीक्षा शुरू होने के 15 घंटे पहले जब पेपर की कॉपी एसटीएफ के हाथ लगी तब पेपर की कॉपी शासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भेजी गई. उन्होंने परीक्षा शुरू होने के तीन घंटे पहले उसके असली होने की पुष्टि की थी तब पेपर निरस्त करने की घोषणा की गई थी.

एसटीएफ के खुलासे में पता चला है कि परीक्षा नियामक अधिकारी संजय उपाध्याय ने बिना किसी जांच पड़ताल के ही पेपर छापने का ठेका दे दिया था. उन्होंने ठेका देने से पहले यह भी नहीं जांचा था कि प्रिंटिंग के सारे मानकों की पूर्ति हो रही है या नहीं. वहीं, प्रिंटिंग का ठेका लेने वाले प्रिंटर ने ठेका हासिल करने के बाद तीन अन्य जगहों से पेपर की छपाई करवाई थी. अधिकारी की इस जरा सी लापरवाही के कारण लाखों अभ्यर्थियों की परीक्षा देने की तैयारी अधूरी रह गई. अब उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इस मामले में कठोर से कठोर कार्रवाई करेगी.

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