मुलायम के निधन पर अखिलेश के साथ साये की तरह शिवपाल, क्या चाचा-भतीजे के रिश्तों की कड़वाहट में आएगी मिठास

मुलायम सिंह यादव की अस्थियां आज हरिद्वार के नमामि गंगे घाट पर विसर्जित होंगी. इस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव परिजनों समेत सैफई से हरिद्वार पहुंच गए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि, क्या चाचा-भतीजे के रिश्तों की कड़वाहट में अब कुछ बदलाव होगा या नहीं...
Bareilly News: सपा संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन 10 अक्टूबर को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल हो गया था. इस दुख की घड़ी में अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव साए की तरह उनके साथ खड़े नजर आए हैं. चाचा-भतीजे के रिश्तों में काफी समय से कड़वाहट थी, लेकिन मुलायम सिंह (नेताजी) के बीमार होने के बाद से शिवपाल सिंह यादव मेदांता से लेकर सैफई में अंत्येष्टि स्थल पर साथ-साथ नजर आए.
दो दिन पूर्व (शनिवार सुबह) पूर्व सीएम अखिलेश यादव, चाचा शिवपाल, भाई धर्मेंद्र सिंह यादव, अंशुल यादव, भतीजे तेज प्रताप और परिवार के दूसरे सदस्यों को साथ लेकर अंत्येष्टि स्थल पर पहुंचे थे. अखिलेश और शिवपाल ने नेताजी की अस्थियां चुनी और उन्हें एक कलश में रखीं. इसके बाद आज यानी 17 अक्टूबर को इन अस्थियों को हरिद्वार की गंगा नदी में विसर्जित करने के लिए चाचा के साथ रवाना हो गए हैं. मुलायम सिंह यादव की अस्थियों का विसर्जन हरिद्वार के नमामि गंगे घाट पर होगा इसके बाद 21 अक्टूबर को सैफई में हिंदू रीति रिवाज के साथ ब्राह्मण भोज और शांति हवन किया जाएगा.
मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद अखिलेश के साथ साए की तरह साथ खड़े नजर आने वाले चाचा शिवपाल सिंह यादव से रिश्ते बेहतर होंगे. यह सवाल सपाइयों के साथ ही हर किसी के जेहन में उठ रहा है. हालांकि, पुराने सपाइयों को उम्मीद है कि, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के खराब रिश्ते मुलायम की मौत से कड़वाहट की बजाए मिठास के रूप में बदलेंगे. इसके बाद ही पार्टी में दम पड़ेगी.
यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में सपा पूर्ण बहुमत की सरकार में आई थी. नेताजी खुद सीएम नहीं बने. उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को सीएम बनाकर सियासी विरासत सौंपने का आगाज किया था. मुख्यमंत्री की कुर्सी भतीजे को मिलने के बाद से शिवपाल के रिश्ते धीरे- धीरे बिगड़ते चले गए. अखिलेश यादव ने अपने चाचा कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव को 2016 में पद से हटा दिया. विधान सभा चुनाव 2017 से पहले अखिलेश यादव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए. उन्होंने शिवपाल सिंह यादव को पार्टी के सभी पदों से मुक्त कर दिया. इसके बाद यह रिश्ते और बिगड़ते चले गए.
सियासी गलियारों में शिवपाल सिंह यादव द्वारा राजस्थान में अखिलेश यादव को लेकर एक बड़ा हवन कराए जाने की चर्चा थी. इस हवन के माध्यम से शिवपाल सिंह यादव पर भतीजे अखिलेश यादव को सियासी और जानमाल का नुकसान कराने का आरोप था. इसी के बाद रिश्तो में कड़वाहट आई. इस हवन को लेकर 2017 में काफी चर्चाएं थी. इसमें पार्टी के नेताओं के साथ ही कुछ अधिकारियों ने रिश्तों में कड़वाहट के बीच घी डालने का काम किया. इससे यह रिश्ते और खराब हो गए.
शिवपाल सिंह यादव ने इटावा की जसवंतनगर विधानसभा सीट से 2017 और 2022 में सपा के टिकट पर ही चुनाव लड़ा. उन्होंने विधानसभा चुनाव 2022 में अखिलेश यादव को नेता स्वीकार कर लिया. मगर, इसके बाद भी रिश्तो में कड़वाहट बरकरार रही. जिसके चलते शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी (प्रसपा) को एक्टिव कर दिया.शिवपाल सिंह ने सपा के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी.
शिवपाल सिंह यादव नेताजी के साथ हमेशा साए की तरह रहते थे.अधिकतर मामलों को निपटाने का जिम्मा नेताजी शिवपाल सिंह यादव को ही देर. वह नेता जी के संघर्ष के दिनों में साथ रहे. इसीलिए नेताजी उनको अपनी सरकार और पार्टी में प्रमुख पदों पर रखते थे. संगठन के मामले में भी शिवपाल सिंह यादव काफी मजबूत है.
रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद, बरेली
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By Sohit Kumar
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