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Supaul News : ब्लड बैंक में छोटे बैग नहीं होने से बर्बाद हो गया 38 यूनिट खून

Updated at : 24 May 2024 8:23 PM (IST)
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सुपौल ब्लड बैंक

सुपौल ब्लड बैंक

जिले का रक्त केंद्र थैलेसीमिया मरीजों के लिए वरदान है. ब्लड बैंक की स्थापना से जरूरतमंदों को आसानी से खून मिल रहा है. 14 जून 2023 से अब तक 888 रक्तवीरों ने ब्लड डोनेट किया है. हालांकि छोटे बैग नहीं होने की वजह से इस दौरान 38 यूनिट खून बर्बाद भी हो गया.

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Supaul News : सुपौल. सदर अस्पताल के प्रथम तल पर अवस्थित ब्लड बैंक से जिले के लोगों को खून की सुविधा तुरंत मिल जाती है. सदर अस्पताल में ब्लड बैंक की स्थापना के बाद से अब तक जिले के विभिन्न संगठन व रक्तवीरों द्वारा कुल 888 यूनिट ब्लड डोनेट किया गया. हालांकि छोटे बैग उपलब्ध नहीं होने से 38 यूनिट खून की बर्बादी भी हो गयी, जो चिंता का विषय है.

वर्ष 2023 में रक्त केंद्र का हुआ था उद्घाटन

14 जून 2023 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा सदर अस्पताल में रक्त केंद्र का उद्घाटन किया था. सदर अस्पताल में रक्त केंद्र होने से पिछले एक साल में कई गंभीर मरीजों को तुरंत ब्लड उपलब्ध हो जाने से उनकी जान बची है. 14 जून 2023 से अब तक ब्लड बैंक में कुल 888 यूनिट ब्लड डोनेट किया गया. जिसमें से 852 यूनिट ब्लड जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया गया. 12 यूनिट ब्लड को विभिन्न कारणों से निरस्त कर दिया गया. जिले में थैलेसीमिया मरीजों के लिए रक्त केंद्र किसी संजीवनी से कम नहीं है. यही कारण है कि अब तक 47 थैलेसीमिया के मरीजों को 113 यूनिट ब्लड दिया गया. इनमें सुपौल के 30 व अन्य जिलों के 17 थैलेसीमिया के मरीज शामिल हैं.

11 हजार 300 एमएल खून की हुई बर्बादी

सदर अस्पताल सुपौल के ब्लड बैंक में मात्र 300 एमएल के एक प्रकार का ब्लड बैग उपलब्ध है. इस कारण ब्लड की बर्बादी भी हो रही है. थैलेसीमिया के मरीजों को एक सौ से दो सौ एमएल के बीच ही ब्लड चढ़ाया जाता है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि अब तक रक्त केंद्र से 47 थैलेसीमिया के मरीज को 113 यूनिट ब्लड दिया गया. मालूम हो कि एक यूनिट ब्लड में 300 एमएल ब्लड होता है. जिसमें से थैलेसीमिया मरीज को मात्र 100 से 200 एमएल तक ही रक्त की जरूरत होती है. छोटे बैग की अनुपलब्धता के कारण बाकी बचा ब्लड बेकार व बर्बाद हो जाता है. मालूम हो कि अब तक ब्लड बैंक से 47 थैलेसीमिया के मरीजों को 113 यूनिट ब्लड दिया गया. जिसमें से करीब 11 हजार 300 एमएल ब्लड की बर्बादी भी हुई है. ब्लड बर्बादी का मुख्य कारण ब्लड बैंक में छोटा बैग का नहीं होना है. ऐसे में करीब 38 यूनिट ब्लड बिना किसी मरीज के काम आये बर्बाद हो गया.

रक्तवीरों की जांच के बाद लिया जाता है खून

रक्तदान के समय कर्मियों द्वारा रक्तवीरों के हीमोग्लोबीन, बीपी, वजन के साथ-साथ उम्र की भी जांच की जाती है.रक्तवीरों द्वारा दान किये गये ब्लड का बाद में ब्लड ग्रुप, एचसीवी, एचबीएसएजी, एचआइवी, मलेरिया, सिफलिस आदि की जांच के बाद ब्लड को स्टोर किया जाता है. इसका उपयोग 35 दिनों के भीतर ही करना होता है. रक्त केंद्र में मेडिकल ऑफिसर महेंद्र नारायण यादव, पांच लैब टेक्नीशियन ठाकुर चंदन सिंह, प्रियंका कुमारी, राज कुमार निरूपम, कुमार भारतेंदु व स्तुति प्रिया, नर्सिंग स्टॉफ ज्योति जांगी, बबीता कुमारी व दीपशिखा एवं परामर्शदात्री किरण किशोर मिश्रा कार्यरत हैं.

थैलेसीमिया मरीजों को चढ़ाया जाता है 100 से 200 एमएल खून : डॉ विनय कुमार

सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विनय कुमार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में थैलेसीमिया मरीजों की संख्या बढ़ी है. बताया कि इनमें सबसे अधिक दो से 10 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं. डॉ कुमार ने बताया कि थैलेसीमिया मरीज को उसके स्वास्थ्य को देखते हुए ब्लड चढ़ाया जाता है. बताया कि ऐसे मरीज को 100 से 200 एमएल के बीच ही ब्लड चढ़ाया जाता है. थैलेसीमिया एक वंशानुगत रक्त विकार है. यह तब होता है, जब शरीर में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनाता है. गंभीर अल्फा थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों के लिए रक्त आधान मुख्य उपचार है. यह उपचार स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं को सामान्य हीमोग्लोबिन प्रदान करता है. लाल रक्त कोशिकाएं केवल तीन महीने ही जीवित रहती हैं, लाल रक्त कोशिकाओं की स्वस्थ आपूर्ति बनाए रखने के लिए बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है. जिन लोगों को थैलेसीमिया होता है, उनके रक्त में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं और सामान्य से कम हीमोग्लोबिन होता है. हीमोग्लोबिन परीक्षण से हीमोग्लोबिन के भीतर मौजूद अल्फा या बीटा ग्लोबीन प्रोटीन शृंखला की समस्याओं का पता चलता है.

छोटे ब्लड बैग की हुई है मांग

रक्त केंद्र के मेडिकल ऑफिसर महेंद्र नारायण यादव ने बताया कि ब्लड बैंक में फिलहाल मात्र एक तरह के ब्लड बैग ही उपलब्ध है. जिसके कारण थैलेसीमिया मरीज को भी 300 एमएल वाला बैग ही दिया जाता है. छोटे ब्लड बैग के लिए विभाग को सूचना दी गयी है. जल्द ही विभाग द्वारा छोटा ब्लड बैग उपलब्ध कराने की बात कही गयी है.

100 एमएल ब्लड बैग नहीं रहने से खून की होती है बर्बादी : सीएस

ब्लड बैंक में 100 एमएल के ब्लड बैग को लेकर विभाग को कई बार कहा गया है. छोटा बैग उपलब्ध नहीं रहने के कारण परेशानी हो रही है. ब्लड की बर्बादी तो जरूर हो रही है. लेकिन थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों को ब्लड उपलब्ध कराना भी जरूरी है. जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जायेगा.
-डॉ ललन कुमार ठाकुर, सिविल सर्जन

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