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पश्चिम बंगाल : लॉकेट चटर्जी को संदेशखाली जाने से पहले ही कोलकाता पुलिस ने लिया हिरासत में

Updated at : 23 Feb 2024 1:01 PM (IST)
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पश्चिम बंगाल : लॉकेट चटर्जी को संदेशखाली जाने से पहले ही कोलकाता पुलिस ने लिया हिरासत में

पश्चिम बंगाल में पुलिस ने बीजेपी की महिला प्रतिनिधिमंडल को संदेशखाली में प्रवेश करने से रोक दिया गया. पार्टी सांसद लॉकेट चटर्जी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल को संदेशखाली से कुछ दूरी पर भोजेरघाट इलाके में हिरासत में लिया गया.

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पश्चिम बंगाल में संदेशखाली में आज फिर हंगामा शुरु हो गया है. भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी को संदेशखाली जाने से पहले ही कोलकाता पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. पुलिस उन्हें जाने से रोक न सके इसके लिए लॉकेट ने रूट तक बदल दिया था लेकिन पुलिस चेंज रूट में भी पहुंची और लंबी बहस के बाद पुलिस ने उन्हें गाड़ी में बैठा कर लाल बाजार ले गई. भाजपा महिला मोर्चा की 7 सदस्य आज सुबह संदेशखाली के लिए रवाना हुईं और पुलिस ने उन्हें भोजेरहाट में रोक दिया. बताया गया कि धारा 144 जारी है, जाना संभव नहीं है. बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी ने जानकारी ली और कहा कि जिस इलाके में उन्हें हिरासत में लिया गया है, वहां धारा 144 नहीं है.

राज्य सरकार सच्चाई छिपाने की कर रही है कोशिश : अग्निमित्रा पॉल

अग्निमित्रा पॉल ने दावा किया, “हमें निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए पुलिस ने संदेशखालि में प्रवेश करने से मना कर दिया गया है. राज्य सरकार सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है.उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखालि में बड़ी संख्या में महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. पांच जनवरी को राशन घोटाले के सिलसिले में शाहजहां के परिसर पर छापा मारने गए प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों पर कथित तौर पर भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसके बाद से वह फरार हैं.

क्या है मामला

पुलिस ने हायर सेकेंडरी परीक्षा का हवाला देकर बीजेपी महिला प्रतिनिधियों का रास्ता रोक दिया. बताया जाता है कि पुलिस संदेशखाली में परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है. भाजपा की महिला प्रतिनिधियों के वहां प्रवेश करने से परेशानी हो सकती है.इसलिए अभी जाने नहीं दिया जा सकता. पुलिस के इस बयान का लॉकेट चटर्जी, प्रियंका टिबरेवाला ने कड़ा विरोध किया. यह खबर सुनकर बीजेपी नेतृत्व नाराज हो गया. उन्हें संदेशखाली से इतनी दूर क्यों रोका गया, गेरुआ शिविर के अंदर पुलिस की भूमिका पर एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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