बाबा मंदिर के महिला शौचालय में मिले नवजात को अपनाने के लिए आगे आए लोग, जानें क्या है गोद लेने की प्रक्रिया

नवजात या बच्चे को गोद लेने के बाद उसकी देखभाल व लालन-पालन में कोई कमी नहीं रहे, इसलिए पूरी जिम्मेदारी के साथ बच्चे को नियमपूर्वक किसी को सौंपा जाता है.
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देवघर, संजीव मिश्रा : बाबा मंदिर के महिला शौचालय में मिले नवजात को अपनाने के लिए कई लोग आगे आए हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि किसी भी बच्चे को गोद लेने की एक कानूनी प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही कोई किसी बच्चे को गोद ले सकता है.
नवजात या बच्चे को गोद लेने की क्या है प्रक्रिया
आइए, आज आपको बताते हैं कि बच्चे को गोद लेने की क्या प्रक्रिया है. क्यों ये कानून बनाया गया. दरअसल, बच्चे को गोद लेने के बाद उसकी देखभाल व लालन-पालन में कोई कमी नहीं रहे, इसलिए पूरी जिम्मेदारी के साथ बच्चे को नियमपूर्वक किसी को सौंपा जाता है.
बाबा मंदिर के शौचालय में मिले नवजात को गोद लेने वालों की होड़
बाबा मंदिर के महिला शौचालय में मिले नवजात को भी कई लोग गोद लेने की इच्छा जता रहे हैं. लोग देवघर बाबा मंदिर आकर इस बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले रहे हैं. बाबा मंदिर के मुख्य प्रबंधक रमेश परिहस्त ने इच्छा जाहिर करने वाले लोगों से प्रशासनिक स्तर से नियमपूर्वक पहल करने की बात कही है. फिलहाल नवजात का सीडब्ल्यूसी की देखरेख में सदर अस्पताल के एसएनसीयू में इलाज चल रहा है.
- बाबा मंदिर के शौचालय में बरामद नवजात का सीडब्ल्यूसी की देखरेख में चल रहा इलाज
- कई लोग जता चुके हैं नवजात को गोद लेने की इच्छा
- देवघर जिले में 30 बच्चों में तीन ही गोद लेने लायक
- बच्चों को गोद लेने के लिए कारा की वेबसाइट पर करना होता है आवेदन
- आवेदक के सत्यापन के बाद कानूनी प्रावधान के तहत किसी को सौंपा जाता है कोई भी बच्चा
बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया
किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए सरकार ने एक प्रक्रिया तय की है. इसके लिए लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है. कारा से प्राप्त आंकड़े के अनुसार, देश भर में गोद लेने के लिए 2,166 बच्चे उपलब्ध हैं. इनमें देवघर जिले में 30 बच्चे हैं. नियम है कि वर्तमान में 3 बच्चे ही गोद लेने लायक हैं. उपलब्ध बच्चों को गोद लेने के लिए 32,320 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. सभी की जांच की जा रही है.
बच्चे को गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी
देवघर जिला से सीडब्ल्यूसी के अधिकारी देवेंद्र पांडेय ने बताया कि किसी भी नवजात को अपने मन से कोई गोद नहीं ले सकता. ऐसा करने वाले की जानकारी प्रशासन को होने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है. अगर किसी को गोद लेना है, तो उन्हें भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित कारा (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) की वेबसाइट cara.wcd.gov.in पर आवेदन करना होगा.
वेबसाइट पर तमाम कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी
वेबसाइट पर जरूरी कागजात अपलोड करने होंगे. जैसे, गोद लेने वाले का वैवाहिक प्रमाण पत्र इत्यादि. अगर गोद लेने वाली महिला है और वह विधवा है, तो पति का मृत्यु प्रमाण पत्र, तलाकशुदा है, तो उसके पेपर, पूरा पता आधार कार्ड आय प्रमाण पत्र आदि जरूरी है. इसके बाद आवेदक की जांच के लिए एजेंसी का चुनाव होगा.
गोद लेने वाले को उसी जिले का बच्चा मिले, जरूरी नहीं
जांच में सब कुछ सही मिलने पर आवेदन पर सहमति जताकर क्यू में लगा दिया जायेगा. उनका नंबर आने पर ई-मेल या फिर एसएमएस के माध्यम से सूचित किया जायेगा. ये जरूरी नहीं है कि उनको उसी जिले का बच्चा मिलेगा, आवेदक को देश भर में कहीं भी बुलाया जा सकता है.
2166 में 748 बच्चे ही पूरी तरह से स्वस्थ
कारा के अनुसार, देश भर में 2,166 बच्चों के लिए कुल 32,320 आवेदन आए हैं. इनमें 748 बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ्य बच्चे हैं. 1,418 बच्चे ऐसे हैं, जिनमें कोई न कोई परेशानी है. वहीं देवघर जिले में अभी 30 बच्चे हैं, जिनमें 3 बच्चे ही गोद लेने लायक हैं.
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By Mithilesh Jha
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