सुवर्णरेखा का जलस्तर बढ़ा, रखी जा रही विशेष निगरानी : इआइसी

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वैतरणी नदी के किनारे की मरम्मत में जुटा प्रशासन.

ओडिशा में सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. गालूडीह बराज से पानी छोड़े जाने के कारण नदी के 11.6 मीटर तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं, अन्य नदियों का जलस्तर नियंत्रण में है.

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भुवनेश्वर : ओडिशा में सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और बुधवार देर रात बालेश्वर जिले के राजघाट में इसके 11.4 से 11.6 मीटर तक पहुंचने की संभावना है. हालांकि, अन्य नदियों का जलस्तर या तो घट रहा है या सामान्य बना हुआ है. ओडिशा के जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप राउत ने बुधवार को यह जानकारी दी.

गालूडीह बराज से छोड़ा गया पानी, सुवर्णरेखा का जलस्तर बढ़ने की आशंका

राउत ने कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और अधिकांश प्रमुख नदियों का जलस्तर या तो स्थिर है या घट रहा है. हालांकि, झारखंड के गालूडीह बराज से पानी छोड़े जाने के कारण सुवर्णरेखा नदी के बढ़ते जलस्तर पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. उन्होंने बताया कि गालूडीह बराज से छोड़ा गया पानी बुधवार रात राजघाट पहुंचने की संभावना है. राजघाट में सुवर्णरेखा का खतरे का स्तर 10.36 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 10.83 मीटर दर्ज किया गया है और इसमें अभी भी वृद्धि हो रही है. अनुमान है कि देर रात नदी का जलस्तर 11.4 से 11.6 मीटर तक पहुंच सकता है. बुधवार सुबह 2:00 से 7:00 बजे के बीच गालूडीह बराज से करीब 6,600 क्यूमेक (घन मीटर प्रति सेकंड) पानी छोड़ा गया. बाद में पानी का बहाव घटकर 5,538 क्यूमेक रह गया. राउत के अनुसार, सुवर्णरेखा में पानी का उच्च प्रवाह करीब आठ से दस घंटे तक बने रहने की संभावना है. इसके बाद गुरुवार सुबह से नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है.

बारिश को लेकर दो दिनों तक कोई चेतावनी नहीं

राउत ने बताया कि बंगाल की खाड़े में बने कम दबाव वाले क्षेत्र का प्रभाव ओडिशा में अब कम हो गया है. सुंदरगढ़ और बरगढ़ जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया था, जबकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले दो दिनों के लिए राज्य में कोई चेतावनी जारी नहीं की है. इस बीच राज्य की अन्य प्रमुख नदियों में भी स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में है. जलका नदी का जलस्तर 6.56 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका खतरे का स्तर 6.50 मीटर है. नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है. ब्राह्मणी नदी के जेनापुर ऑब्जर्वेशन साइट पर जलस्तर 21.66 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 22 मीटर और खतरे का स्तर 23 मीटर है. राउत ने बताया कि रेंगाली प्रणाली के माध्यम से ब्राह्मणी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा रहा है और बारिश नहीं होने के कारण फिलहाल बाढ़ की स्थिति की आशंका नहीं है. वैतरणी नदी का जलस्तर भी अखुआपदा में घटने का रुख दिखा रहा है. वहां जलस्तर 18.57 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 18.33 मीटर है. मंगलवार को यहां जलस्तर करीब 19.4 मीटर तक पहुंच गया था. सालंदी नदी का जलस्तर पिछले दो दिनों से लगभग स्थिर बना हुआ है. भद्रक में इसका जलस्तर 16.4 फीट दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 17 फीट है. वहीं, बूढ़ाबलंग नदी में भी जलस्तर घट रहा है और यह 17.12 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 18.13 मीटर है.

बाढ़ प्रभावितों में राहत सामग्री का वितरण करती टीम.
बाढ़ प्रभावितों में राहत सामग्री का वितरण करती टीम.

एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना, 22 से और बढ़ेगी बारिश

22-23 अगस्त के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा तट पर एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. एक सिस्टम के जाने के बाद, दूसरा सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जिसके असर से 22 अगस्त से राज्य भर में बारिश फिर से बढ़ने की उम्मीद है. इस बीच, झारखंड और उससे सटे उत्तरी गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल पर एक सक्रिय डिप्रेशन (कम दबाव का क्षेत्र) बना हुआ है. पिछले छह घंटों में यह 12 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है. इस डिप्रेशन के कारण, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर और बरगढ़ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. मयूरभंज, क्योंझर, देवगढ़, अनुगूल, बौध, सोनपुर और बलांगीर जिलों में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा सिस्टम के कमजोर होने पर कल से बारिश की तीव्रता कम हो जायेगी. हालांकि, नया कम दबाव का क्षेत्र 22 अगस्त से बारिश का एक और दौर ला सकता है.

रेस्कयू करती टीम.
रेस्कयू करती टीम.

केंद्रपाड़ा में आवासीय स्कूल में फंसे 300 बच्चे, तीन दिन बाद रेस्क्यू

ओडिशा में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. केंद्रपाड़ा जिले के पट्टामुंडई इलाके में बाढ़ की वजह से कुलाशाही रेजिडेंशियल स्कूल में फंसे 300 से ज्यादा छात्रों को निकालने के लिए ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन टीम (ओड्राफ) ने बुधवार को बचाव अभियान चलाया. दोपहर तक 50 से अधिक बच्चों को रेस्क्यू किया गया था. ब्राह्मणी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने और स्कूल परिसर में पानी भर जाने के कारण ये छात्र पिछले चार दिनों से फंसे हुए हैं. उन्हें पहले खाना और पीने का पानी तो पहुंचाया गया था, लेकिन उन्हें वहां से निकालने का कोई काम नहीं किया गया. अब जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया है. बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए ओड्राफ की 25 सदस्यीय टीम को तीन यूनिट में बांटा गया है और तीन पावर बोट की मदद ली जा रही है.


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Bipin Kumar Yadav

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