Rourkela News: अब हॉकी वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनेगी एयरपोर्ट चौक की पहचान

Rourkela News: एयरपोर्ट चौक पर हॉकी खिलाड़ी की लौह प्रतिमा गिरने के 15 महीने बाद हॉकी वर्ल्डकप ट्रॉफी की आकृति स्थापित की गयी. इससे यहां रौनक लौटने की उम्मीद है.
Rourkela News: हॉकी विश्वकप-2023 से पहले स्थापित हॉकी खिलाड़ी की 40 फीट ऊंची प्रतिमा के धराशायी होने के 15 माह बाद रविवार को राउरकेला के एयरपोर्ट चौक पर प्रशासन की ओर से हॉकी विश्व कप ट्रॉफी की आकृति स्थापित की गयी. स्टेनलेस स्टील से बनी इस आदमकद प्रतिमा के स्थापित होने के बाद महीनों से सुनसान पड़े एयरपोर्ट चौक पर फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जतायी जा रही है. क्रेन की सहायता से विश्व कप ट्रॉफी की प्रतिकृति को उसी जगह स्थापित किया गया, जहां पर हॉकी खिलाड़ी की प्रतिमा स्थापित थी. विश्वकप की प्रतिमा स्थापित कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि इसका वजन करीब 3.30 टन है.
11 जून 2023 को धराशायी हो गयी थी प्रतिमा
हॉकी विश्वकप-2023 के आयोजन से पहले राउरकेला एयरपोर्ट का विकास किया गया था. साथ ही इलाके की पहचान के लिए बिरसा मुंडा स्टेडियम गेट नंबर-2 की ओर जाने वाली सड़क के चौक पर स्क्रैप मेटल से बनी हॉकी खिलाड़ी की 40 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित की गयी थी. इसे देखने के लिए शहरभर से लोग आते थे. यह इलाका सेल्फी प्वाइंट में तब्दील हो गया था. लेकिन हॉकी विश्वकप के आयोजन के बाद 11 जून, 2023 को हवा के झोंके ने इस प्रतिमा को धराशायी कर दिया था. जिसके बाद प्रशासन से लेकर सरकार तक की किरकिरी हुई थी. घटिया काम का आरोप लगाया गया और माना गया कि विश्व कप के आयोजन के दौरान जितने भी कार्य हुए, इनमें गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया. बहरहाल लोगों को इंतजार था कि प्रतिमा धराशायी होने के बाद दोबारा कब स्थापित होगी. जिसे आज पूरा कर दिया गया.
सात जनवरी, 2023 को तत्कालीन सीएम नवीन ने किया था उद्घाटन
हॉकी वर्ल्डकप-2023 को यादगार बनाने के लिए राउरकेला में कई विकास व सौंदर्यीकरण कार्य किये गये थे. इसी क्रम में भुवनेश्वर की मशहूर मूर्तिकला कंपनी इमेजरी ने एयरपोर्ट चौक पर हॉकी खिलाड़ी की प्रतिमा स्थापित की थी. इस प्रतिमा का निर्माण तीन महीने के अंदर पूरा किया गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सात जनवरी, 2023 को अपने राउरकेला दौरे पर प्रतिमा का अनावरण किया था. तभी से यह प्रतिमा शहर में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई थई. हालांकि, निर्माण के छह माह बाद ही यह प्रतिमा धराशायी हो गयी थी. इसे टुकड़ों में काटकर हटा दिया था. उस समय जिला प्रशासन ने कहा था कि उसी स्थान पर नयी प्रतिमा स्थापित होगी. हैरानी की बात यह है कि प्रतिमा के हवा के झोंके से गिरने के बावजूद इस मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई.
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