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चौक-चौराहों पर जुट रही चुनावी विश्लेषकों की भीड़, हार-जीत को लेकर अटकलों का बाजार गर्म

Updated at : 22 May 2024 11:29 PM (IST)
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चौक-चौराहों पर जुट रही चुनावी विश्लेषकों की भीड़, हार-जीत को लेकर अटकलों का बाजार गर्म

सोमवार को मतदान संपन्न होने के बाद अब हर जगह हार जीत को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है.कोई बीजद को जिता रहा है, तो कोई भाजपा की जीत का दावा कर रहा है. वहीं कुछ लोग कांग्रेस को भी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करनेवाला दल बता रहा है.

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झारसुगुड़ा. सोमवार को मतदान संपन्न होने के बाद अब हर जगह हार जीत को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. सुबह से लेकर शाम तक हार-जीत को लेकर विश्लेषण करने के लिए चौक-चौराहों से लेकर पान की दुकान से लेकर चाय की टपरी पर तथाकथित चुनावी विश्लेषकों की भीड़ जुट रही है. जिसमें कोई बीजद को जिता रहा है, तो कोई भाजपा की जीत का दावा कर रहा है. वहीं कुछ लोग कांग्रेस को भी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करनेवाला दल कह रहे हैं.

बीजद व भाजपा के बीच जीत का अंतर तय करेगी कांग्रेस

झारसुगुड़ा जिले की दोनों विधानसभा सीट पर इस बार बीजद व भाजपा में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. जहां इन दोनों दलों के नेता अपनी-अपनी जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त दिख रहे हैं. लेकिन इस बार झारसुगुड़ा निर्वाचन मंडली में जिस प्रकार से रिकॉर्ड संख्या में मतदान हुआ है. उसे देखते हुए झारसुगुड़ा विधानसभा में बीजद उम्मीदवार दीपाली दास व भाजपा प्रत्याशी टंकधर त्रिपाठी के बीच कड़े मुकाबले के कयास लगाये जा रहे हैं. यहां से कांग्रेस उम्मीदवार अमिता बिस्वाल, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत हेमानंद बिस्वाल की पुत्री हैं, उनके प्रर्दशन पर बीजद व भाजपा के बीच हार जीत का फासला निर्भर करता है. कांग्रेस के वोट बैंक में बीजद व भाजपा कितना सेंध लगा सकी हैं, इस पर सभी की नजर है. झारसुगुड़ा विधानसभा में रिकॉर्ड 82.75 प्रतिशत मतदान बहुत कुछ इशारा कर रहा है.

एंटी इनकंबेंसी भी रिकॉर्ड मतदान का कारण!

कुछ राजनीतिक दल के नेताओं के अनुसार इस बार एंटी इनकंबेंसी भी रिकॉर्ड मतदान का एक कारण है. इस बार कई स्थानों पर बीजद व भाजपा कर्मियों के बीच वाद-विवाद, मारपीट, रुपये छीनने, गाड़ी में तोड़ फोड़ जैसी घटनाओं ने मतदाताओं को प्रतिक्रियाशील बना दिया, जिसके कारण मतदाताओं ने आक्रोश प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में मतदान किया है. यह बात विरोधी दल के नेता कह रहे हैं. दोनों दलों के नेताओं के चुनावी भाषण ने भी कर्मियों में जोश भरने का काम किया है. लेकिन किसके सिर विजय का ताज सजेगा, यह तो चार जून को मतगणना के बाद ही पता चलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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