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मिलिए देश की सकारात्मक सोच वाली 3 फीट 11 इंच की अधिवक्ता हरविंदर कौर जनगल से, अवसाद से उबर कर हासिल की मंजिल

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
हरविंदर कौर जनगल
हरविंदर कौर जनगल
सोशल मीडिया

नयी दिल्ली : हरविंदर कौर जनगल जालंधर सत्र न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस करती हैं. 25 वर्षीय हरविंदर कौर की ऊंचाई करीब तीन फीट 11 इंच है. उन्होंने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा से लाइसेंस प्राप्त किया है. हरविंदर कौर जनगल को भारत की सबसे छोटी अधिवक्ता माना जा रहा है.

लाइफ बियॉन्ड नंबर्स की खबर के मुताबिक, हरविंदर कौर जनगल बचपन से एयर होस्टेस बनना चाहती थीं. लेकिन उसका सपना उसके शारीरिक विन्यास के कारण टूट गया. लंबाई में छोटी होने के कारण उसके परिजन चिकित्सकों के पास ले गये. लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ. मालूम हो कि हरविंदर के घर में सभी की लंबाई सामान्य है. उसके पिता शमशेर सिंह फिल्लौर ट्रैफिक पुलिस में एएसआई हैं. वहीं, उसकी मां सुखदीप कौर गृहिणी हैं.

सपने पूरे करने में लंबाई बाधा बनीं, तो वह तीव्र अवसाद में चली गयी. लेकिन, उसने जादुई रूप से अपनी सारी ताकत और इच्छाशक्ति को एकत्रित करते हुए सबकुछ ठीक करने का फैसला किया. 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद हरविंदर कौर जनगल ने कानून की पढ़ाई करने का फैसला किया. लोग उसके मजाक बनाते थे, सवाल करते थे. लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और वह अपने दृढ़ इरादे पर अडिग रहीं.

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 23 नवंबर, 2020 को उन्होंने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा द्वारा लाइसेंस और नामांकन क्लाइंट प्रमाणपत्र हासिल किया. हरविंदर का कहना है कि उसके सहयोगी और पूरी कानून बिरादरी का रवैया उनके साथ बहुत सौहार्दपूर्ण रहा. हालांकि, अदालत में उसे अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ा. लोगों के सवालों पर मुस्कुरा कर आगे बढ़ने लगी.

हरविंदर कौर जनगल अधिवक्ता होने के साथ इंस्टाग्राम पर एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं. उनके हजारों फॉलोअर्स हैं. वह अपने प्रशंसकों के लिए पंजाबी गानों पर लिप-सिंक भी करती हैं. हरविंदर कौर महिलाओं और बच्चों के लिए लड़ना चाहती हैं. हरविंदर का कहना है कि बहुत कम उम्र में ही चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने बहुत कुछ सीखा है.

हरविंदर कौर का कहना है कि ''एक समय था, जब मैं अपनी जिंदगी से तंग आ गयी थी. मैं रोती थी कि भगवान ने मुझे ऐसा क्यों बनाया है. लोगों ने जो घटिया बातें कहीं, उनका मुझ पर बहुत असर हुआ. फिर मैंने मोटिवेशनल वीडियो देखना शुरू किया. इसने वास्तव में मेरी मदद की. मैंने आत्मविश्वास हासिल करना शुरू कर दिया. अब मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे विश्वास होने लगा है कि अगर भगवान ने मुझे बनाया है, तो मेरे लिए उनका एक उद्देश्य है और मुझे इसे पूरा करने की जरूरत है.''

साथ ही कहा है कि ''मुझे उन लोगों द्वारा ताना मारा जाता था, जो कहते थे कि कानून मेरे लिए नहीं है. मैं केस कैसे लड़ूंगी? मैं जज के सामने कैसे खड़ा हो सकती थी? वे मुझ पर हंसते थे. लेकिन, मैं कहती थी कि मुझे नहीं लगता कि मेरा कद मुझे एक सफल वकील बनने से रोकेगा. क्योंकि, यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें शारीरिक बनावट मायने नहीं रखती, ज्ञान और शिक्षा मायने रखती है.''

बहादुर हरविंदर कौर ने कहा कि ''जब मैं अदालत में होती हूं, वहां अपराधी, गवाह आदि जैसे लोग होते हैं, जो मुझे बहुत अजीब तरह से देखते हैं और फुसफुसाते हैं. वो मुझे असहज करने की कोशिश करते हैं. लेकिन, मैं इन सब बातों को दरकिनार कर अपने काम पर फोकस करती हूं. मैं बस मुस्कुराती हूं और अपने रास्ते पर चलती हूं.''

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