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Coronavirus in Indore : इंदौर के अस्पतालों में भटकते रहे कोरोना के तीन मरीज, नहीं किया भर्ती, अब 54 साथियों को भी किया क्वारेंटाइन

Updated at : 18 Apr 2020 11:43 AM (IST)
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Coronavirus in Indore : इंदौर के अस्पतालों में भटकते रहे कोरोना के तीन मरीज, नहीं किया भर्ती, अब 54 साथियों को भी किया क्वारेंटाइन

three coronavirus patients wandering in indore hospitals not admitted, now 54 colleagues quarantined इंदौर : मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस का रेड जोन बन चुके इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लापरवाह है. सराफा थाना के पास स्थित मोरसली गली में एक बिल्डिंग में रह रहे तीन बंगाली कारीगरों में कोरोना के लक्षण मिले. ये लोग अस्पतालों का चक्कर लगाते रहे, लेकिन कहीं इन्हें भर्ती नहीं किया गया. मजबूरन तीनों बंगाली कारीगर लौटकर अपने 54 साथियों के साथ रहने लगे. रिपोर्ट आने के बाद इन्हें शुक्रवार (17 अप्रैल, 2020) को कोविड अस्पताल पहुंचाया गया. इनके साथियों को भी क्वारेंटाइन कर दिया गया.

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इंदौर : मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस का रेड जोन बन चुके इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लापरवाह है. सराफा थाना के पास स्थित मोरसली गली में एक बिल्डिंग में रह रहे तीन बंगाली कारीगरों में कोरोना के लक्षण मिले.

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ये लोग अस्पतालों का चक्कर लगाते रहे, लेकिन कहीं इन्हें भर्ती नहीं किया गया. मजबूरन तीनों बंगाली कारीगर लौटकर अपने 54 साथियों के साथ रहने लगे. रिपोर्ट आने के बाद इन्हें शुक्रवार (17 अप्रैल, 2020) को कोविड अस्पताल पहुंचाया गया. इनके साथियों को भी क्वारेंटाइन कर दिया गया.

सराफा थाना के पास स्थित मोरसली गली में एक बिल्डिंग में कोलकाता, हुगली और चौबीस परगना के कई युवक एक साथ रहते हैं. सभी सराफा में सोना-चांदी के जेवरात बनाते हैं. पांच दिन पूर्व स्क्रीनिंग करने वाली टीम जब इस बिल्डिंग में आयी, तो तीन युवकों में कोरोना के लक्षण मिले.

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शुरुआती जांच में डॉक्टर ने कोरोना की आशंका जताते हुए तत्काल इन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती होने को कहा. तीनों युवक एंबुलेंस से इंडेक्स मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि सर्दी-खांसी तो होती रहती है. इसके बाद तीनों युवक सुयश और एमवाय अस्पताल गये, लेकिन यहां भी इन्हें भर्ती नहीं किया गया. घंटों भटकने के बाद तीनों आखिरकार अपनी बिल्डिंग में लौट आये और 54 अन्य कारीगरों के साथ रहने लगे.

गुरुवार की रात जब रिपोर्ट आयी और दो युवकों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग व पुलिस अफसरों की टीम इन युवकों के पास पहुंची. पॉजिटिव मरीजों को कोविड अस्पताल भिजवाया गया, जबकि अन्य 55 साथियों को क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया गया.

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उल्लेखनीय है कि सराफा में करीब 11 हजार बंगाली कारीगर काम करते हैं. कुछ कारीगर ठेकेदार के अधीन काम करते हैं, तो कुछ व्यापारियों के पास आभूषण बनाने का काम करते हैं. इनमें से अधिकतर लोग सराफा, मोरसली गली, जूना रिसाला, एरोड्रम, कबूतर खाना एवं पल्हर नगर में किराये के मकान में रहते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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