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लॉकडाउन का सख्ती से पालन नहीं हुआ, तो मई में मध्यप्रदेश में होंगे Covid19 के 50 हजार से अधिक मरीज

Updated at : 17 Apr 2020 10:34 AM (IST)
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लॉकडाउन का सख्ती से पालन नहीं हुआ, तो मई में मध्यप्रदेश में होंगे Covid19 के 50 हजार से अधिक मरीज

इंदौर : कोविड-19 के फैलाव को लेकर एक सांख्यिकीय अध्ययन में अनुमान जताया गया है कि मध्यप्रदेश में मई के मध्य में इस महामारी का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच सकता है. राज्य में 50 हजार से अधिक मरीज हो जायेंगे. अध्ययन के मुताबिक, ऐसे में राज्य के अस्पतालों में करीब 27,000 अतिरिक्त बिस्तरों की जरूरत पड़ सकती है.

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इंदौर : कोविड-19 के फैलाव को लेकर एक सांख्यिकीय अध्ययन में अनुमान जताया गया है कि मध्यप्रदेश में मई के मध्य में इस महामारी का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच सकता है. राज्य में 50 हजार से अधिक मरीज हो जायेंगे. अध्ययन के मुताबिक, ऐसे में राज्य के अस्पतालों में करीब 27,000 अतिरिक्त बिस्तरों की जरूरत पड़ सकती है.

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इंदौर के भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM-I) के सहायक प्रोफेसर सायंतन बनर्जी ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वीरा बालदंडयुथपाणि और अमेरिका के इस उच्च शिक्षा संस्थान के तीन अन्य शोधकर्ताओं के साथ यह अध्ययन किया है.

उन्होंने कहा, ‘हमारे सांख्यिकीय अध्ययन के मुताबिक प्रदेश में कोविड-19 के मरीजों की तादाद मई के मध्य में चरम पर पहुंच सकती है. ऐसे में राज्य के अस्पतालों में 12,000 से लेकर 27,000 तक अतिरिक्त बिस्तरों की जरूरत पड़ सकती है.’

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श्री बनर्जी ने सुझाव दिया कि प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह लॉकडाउन अवधि का अधिकतम उपयोग करते हुए कोविड-19 से लड़ने के लिए चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाये, लोगों की और तेजी से जांच कराये और समूची स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाये.

इसके साथ ही, जनता को भी सामाजिक मेल-जोल से पूरी तरह दूरी बनाने और साफ-सफाई को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया. जैव सांख्यिकी के जानकार ने आशंका जतायी कि यदि प्रदेश में तेज दर से कोविड-19 का फैलाव होता रहा, तो अप्रैल के अंत तक इस महामारी के लगभग 2,500 और मई के अंत तक 50,000 से अधिक मामले सामने आ सकते हैं.

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श्री बनर्जी ने हालांकि कहा कि जरूरी कदम उठाते हुए इस बीमारी के फैलने की रफ्तार को थाम लिया गया, तो यह संख्या अप्रैल के अंत तक लगभग 650 और मई के अंत तक 3,000 मामलों तक सिमट सकती है.

उन्होंने यह भी सुझाया कि प्रशासन को राज्य भर में फल-सब्जियों, अंडों और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बहाल करनी चाहिए, ताकि आम लोगों में सही पोषण के जरिये कोविड-19 के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सके.

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देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल इंदौर में बृहस्पतिवार सुबह 110 नये मामले सामने आने के बाद प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 1,090 हो गयी. इनमें से 55 लोग इलाज के दौरान दम तोड़ चुके हैं, जिनमें अकेले इंदौर के 39 मृतक शामिल हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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