Coronavirus Outbreak: एक गलत WhatsApp मैसेज ने इंदौर को कोरोना की भट्टी में झोंक दिया, जानिए कैसे

इंदौर : कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर की सूरत बिगाड़ने में राजनीतिक अस्थिरता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप्प (WhatsApp) का बहुत बड़ा योगदान रहा. पूरे राज्य के कुल कोविड19 के मामलों में 55 फीसदी इस शहर के हैं. कोरोना से हुई कुल मौत में 73 फीसदी मौतें इसी शहर में हुई हैं. राजनेता से लेकर अधिकारी तक अब इस बात को मान रहे हैं कि राज्य का यह सबसे बड़ा शहर इस महामारी से निबटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था.
इंदौर : कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर की सूरत बिगाड़ने में राजनीतिक अस्थिरता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप्प (WhatsApp) का बहुत बड़ा योगदान रहा. पूरे राज्य के कुल कोविड19 के मामलों में 55 फीसदी इस शहर के हैं. कोरोना से हुई कुल मौत में 73 फीसदी मौतें इसी शहर में हुई हैं. राजनेता से लेकर अधिकारी तक अब इस बात को मान रहे हैं कि राज्य का यह सबसे बड़ा शहर इस महामारी से निबटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था.
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जमीनी स्तर के अधिकारी से लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता और अन्य दलों के राजनेता भी कह रहे हैं कि मध्यप्रदेश इस बीमारी को लेकर गंभीर नहीं था. इससे निबटने के लिए तो कतई तैयार नहीं था. वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप्प (WhatsApp) ने समस्या को और गंभीर बना दिया. व्हाट्सएप्प के जरिये इंदौर में मुस्लिम समुदाय के लोगों को जांच नहीं करवाने के लिए भड़काया गया. वहीं, सरकार को लेकर चल रही अनिश्चितताओं ने मुश्किलें और बढ़ा दी.
इंदौर में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 117 नये मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बुधवार (15 अप्रैल, 2020) की सुबह बढ़कर 544 पर पहुंच गयी. हालांकि, शहर में इन मरीजों की मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गयी है. लेकिन, यह दर राष्ट्रीय औसत से अब भी कहीं ज्यादा बनी हुई है, जिससे चिकित्सक समुदाय की चिंताएं बरकरार हैं. मध्यप्रदेश में मंगलवार की रात तक मरने वाले 53 लोगों में 37 लोगों की मौत इंदौर के थे. अब भी 13 लोग गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि देश का सबसे सख्ती से इंदौर में लॉकडाउन का पालन कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शुरू से ही बहुत सावधानी बरतने की जरूरत थी. इंदौर एक औद्योगिक शहर है, जो देश के अन्य राज्यों से हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक समस्याओं की वजह से इस महामारी से निबटने में विलंब हुआ और इसने विकराल रूप धारण कर लिया. मार्च के अंत तक स्थिति बिल्कुल स्पष्ट नहीं थी.
भाजपा महासचिव और इंदौर की पूर्व सांसद एवं विधायक रहीं सुमित्रा महाजन ने भी स्वीकार किया कि शुरू में कुछ खामियां रह गयीं. वहीं, एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी ने कहा कि इंदौर में शुरू-शुरू में चार-पांच जगहों पर कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले सामने आये थे. खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में. इसमें बक्खल भी शामिल है. उन्हीं इलाकों में अब बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस के संक्रमण का विस्तार हो गया है.
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इंदौर जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरू-शुरू में मुस्लिमों के मन में व्हाट्सएप्प मैसेज के जरिये एक डर फैला दिया गया था कि इस समुदाय के लोगों में इंजेक्शन के जरिये कोरोना वायरस को इंजेक्ट करके उनके पूरे परिवार को क्वारेंटाइन में भेज दिया जायेगा और सबमें संक्रमण फैल जायेगा. ऐसा व्हाट्सएप्प ग्रुप चलाने वाले कम से कम तीन लोगों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है और उनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया है.
इंदौर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ ज्योति बिंदाल ने शहर में हुई 23 मौतों के अध्ययन के आधार पर कहा कि अधिकतर मामलों में मरीजों का देर से अस्पताल पहुंचना और उनमें कई और समस्याएं मौत की मुख्य वजह रही. उन्होंने कहा कि जिन मरीजों की मौत हुई, उन्हें टीबी, एचआइवी और डायबिटीज की गंभीर समस्याएं थीं. इनमें से अधिकतर लोग बहुत देर से अस्पताल लाये गये और उन्हें सीधे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा.
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हालांकि, कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने पूरा ठीकरा शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर फोड़ा. उन्होंने इसे शिवराज सरकार की ‘आपराधिक लापरवाही’ करार दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा और इसके नेताओं ने शुरू में कोरोना वायरस की चेतावनी का मजाक उड़ाया. कोविड19 का मजाक उड़ाने वालों में शिवराज सिंह चौहान भी शामिल थे.
इंदौर नगर निगम के कमिश्नर आशीष सिंह ने कहा है कि पूरे शहर में सख्ती से लॉकडाउन का पालन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अब यदि आप कोरोना के मामलों पर नजर डालेंगे, तो पायेंगे कि सभी मामले 14 से 20 दिन पुराने हैं. हमारे पास बहुत से पेंडिंग सैंपल थे, जिन्हें हमने दिल्ली भेज दिया है. दो-तीन दिन तक मामलों में तेजी देखी जायेगी. लेकिन, इसके बाद कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में कमी आ जायेगी. सब सात दिनों का खेल है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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