टाटा कॉलेज के अकाउंट से 1.58 करोड़ की निकासी मामले में रामगढ़ व कटक की कंपनी और पीएनबी के प्रबंधक पर प्राथमिकी

पीएनबी के ब्रांच में पूछताछ करते पुलिस पदाधिकारी. फोटो : प्रभात खबर
Chaibasa News: चाईबासा स्थित टाटा कॉलेज से 1.58 करोड़ रुपए की निकासी मामले में कार्रवाई शुरू हो गयी है. 2 कंपनियों और पीएनबी के मैनेजर पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. जानें किस स्तर पर चल रही है जांच.
Chaibasa News: कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) के टाटा कॉलेज के बैंक (पीएनबी) खाते से दो फर्जी चेक के सहारे एक करोड़ 58 लाख 96 हजार 800 रुपए की निकासी की जांच शुरू हो गयी है. इस संबंध में बुधवार को कुलसचिव डॉ पी सियाल ने मुफस्सिल (चाईबासा) थाना में रामगढ़ (झारखंड) की राधारानी इंटरप्राइजेज, कटक (ओडिशा) की शानू चिंता इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और टाटा कॉलेज के प्रशासनिक भवन में स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के शाखा प्रबंधक सुरेश पुरती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. इसमें बताया गया कि प्रथम दृष्टया उक्त आरोपियों की संलिप्तता का शक है. थाने से इसकी जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गयी है. मामले में पुलिस ने बुधवार को विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी और पीएनबी शाखा के पदाधिकारियों से पूछताछ की.
चाईबासा से रांची तक बढ़ी सरगर्मी
इस मामले ने चाईबासा से रांची तक सरगर्मी बढ़ा दी है. बुधवार को वरीय पुलिस पदाधिकारियों ने केयू के एफओ कार्यालय में पदाधिकारी व कर्मियों से मामले की जानकारी ली. कड़ी से कड़ी जोड़ने का प्रयास किया.
एक सप्ताह बाद कंपनी ने मोबाइल नंबर बदला
बुधवार को पीएनबी के वरीय पदाधिकारी रांची से चाईबासा पहुंचे. केयू के वित्त विभाग में जानकारी लेने के बाद पुलिस पदाधिकारी, कुलसचिव और वित्त पदाधिकारी के साथ पीएनबी के शाखा कार्यालय पहुंचे. उन्होंने ब्रांच मैनेजर से कई सवाल किये. उनसे पूछा कि उन्हें कब जानकारी मिली? इसके बाद क्या किया? बताया गया कि एक सप्ताह के बाद उक्त कंपनी का मोबाइल नंबर बदल दिया गया. बैंककर्मी को शक हुआ, तो 12 फरवरी को टाटा कॉलेज के कर्मी (अकाउंट से संबंधित कार्य करते हैं) को बताया.
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डेढ़ करोड़ से अधिक का मामला था, फिर भी पदाधिकारी से बात नहीं की
ब्रांच मैनेजर से पूछा गया कि अकाउंट (ए) से राशि निकासी विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी और कुलसचिव के हस्ताक्षर के माध्यम से होती है. ऐसे में टाटा कॉलेज के प्रो इंचार्ज द्वारा जारी पत्र पर शक क्यों नहीं हुआ? अमूमन एक लाख से अधिक की राशि की निकासी पर संबंधित पदाधिकारी को पूछा जाता है. मामला एक करोड़ रुपए से अधिक का था, तो जरूरत क्यों नहीं महसूस हुई? पुलिस पदाधिकारियों ने साइबर सेल और कई नंबरों के माध्यम से जांच की.
कोल्हान विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने अकाउंट डिटेल्स को खंगाला
केयू के पदाधिकारियों ने बैंक खाते के डिटेल्स की जांच की. पिछले कुछ दिनों में राशि किस-किस को और कब-कब भेजी गयी, इसकी जांच की. जांच के दौरान कुलसचिव, पूर्व कुलसचिव, डीएसडब्ल्यू, प्रॉक्टर और अन्य उपस्थित थे.
घटना की जांच की जा रही है. अभी मामले में कुछ भी सटीक नहीं कहा जा सकता है.
बहमन टूटी, एसडीपीओ, सदर अनुमंडल
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By Mithilesh Jha
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