आदिवासियों के कारण बचे हैं जंगल: प्रो विनिता
Updated at : 30 Mar 2017 4:03 AM (IST)
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पर्यावरण व आदिवासी को बचाते हुए विकास होना चाहिए सारंडा से छेड़छाड़ जीवन के लिए खतरा चाईबासा : सारंडा में आदिवासियों की स्थिति दयनीय है. आदिवासियों की वजह से जंगल बचे हुए हैं. सारंडा से छेड़छाड़ करना मानव जीवन के लिए खतरनाक है. उक्त बातें यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स (इंग्लैड) के प्रो विनिता दमोदरन ने कहीं. […]
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पर्यावरण व आदिवासी को बचाते हुए विकास होना चाहिए
सारंडा से छेड़छाड़ जीवन के लिए खतरा
चाईबासा : सारंडा में आदिवासियों की स्थिति दयनीय है. आदिवासियों की वजह से जंगल बचे हुए हैं. सारंडा से छेड़छाड़ करना मानव जीवन के लिए खतरनाक है. उक्त बातें यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स (इंग्लैड) के प्रो विनिता दमोदरन ने कहीं. वे बुधवार को कोल्हान विवि के इतिहास विभाग में एनवायरमेंट एंड आदिवासी इन इस्टर्न इंडिया- एन हिस्टॉरिकल प्रोविंग विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहीं थीं.
लूटी जा रही है आदिवासियों की जमीन
उन्होंने कहा कि आदिवासी आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के लिये जद्दोजहद कर रहे हैं. विकास के नाम पर आदिवासियों की जमीन लूटी जा रही है, लेकिन आदिवासी बेरोजगार हो रहे हैं. सरकार को इसपर मंथन करने की जरूरत है इसी तरह से चलता रहा, तो एक दिन सारंडा खत्म हो जायेगा. लोग शुद्ध हवा के लिये तरस जायेंगे. विकास होना चाहिए, लेकिन पर्यावरण व आदिवासी को बचाते हुए विकास हो.
इस तरह का सेमिनार करना गर्व की बात : वीसी
कुलपति डॉ आरपीपी सिंह ने कहा कि विवि में इस तरह का सेमिनार करना गर्व की बात है. पहली बार अंतराष्ट्रीय स्तर का सेमिनार हुआ है, जो इतिहास के पन्नों पर लिखा जायेगा. मौके पर प्रोवीसी डॉ रंजीत सिंह, सोशल साइंस डीन डॉ आशा मिश्रा, डॉ एके पॉल, डॉ पद्मजा सेन, डॉ अशोक सेन, डॉ आरएस दयाल, डॉ डीके मित्रा, डॉ डीएन महतो, डॉ केआर कुईरी, अंजना सिंह, डॉ नीलम सिंह, डॉ एसपी मंडल समेत अन्य उपस्थित थे.
कोल्हान विश्वविद्यालय : इतिहास विभाग में आदिवासियों के विकास पर कार्यशाला
आदिवासी की जमीन पर विकास हो रहा, आदिवासियों का नहीं
यूनिवर्सिटी ऑफ टॉयटो जापान के डॉ रोहन डिसूजा ने कहा कि पर्यावरण तभी जीवित हो सकता है, जब हम स्वयं को बदलेंगे. आदिवासी की जमीन पर विकास हो रहा है, लेकिन आदिवासियों का विकास नहीं हो रहा.
… तो ऑक्सीजन भी 15 साल बाद बिकेगा :डुंगडुंग
प्रसिद्ध लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि अगर सरकार अभी उचित निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले 15 साल बाद देश में ऑक्सीजन बिकने लगेगा. भारत में 141 नदी सूख चुकी है. आगे भी सूखती रहेगी. जिस तरह से विकास के नाम पर जंगल की कटाई हो रही है. देश के लिये भयावह स्थिति है. सरकार ने वन अधिनियम बनाया, लेकिन इसका पालन दूर-दूर तक नहीं होता है.
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