नोवामुंडी: क्लास में खड़े होकर पढ़ते हैं बच्चे

Updated at : 24 Oct 2016 6:08 AM (IST)
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नोवामुंडी: क्लास में खड़े होकर पढ़ते हैं बच्चे

छह कमरों वाले विद्यालय में पढ़ने आते हैं 629 छात्र 40 विद्यार्थियों की क्षमता वाले कक्षा में 107 बैठते हैं किचन जर्जर, बरामदे में पकाया जाता है मध्याह्न भोजन नोवामुंडी : नोवामुंडी बाजार स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है. विद्यालय में कमरों की कमी के कारण कंप्यूटर और सिलाई-कढ़ाई की पढ़ाई सात […]

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छह कमरों वाले विद्यालय में पढ़ने आते हैं 629 छात्र

40 विद्यार्थियों की क्षमता वाले कक्षा में 107 बैठते हैं
किचन जर्जर, बरामदे में पकाया जाता है मध्याह्न भोजन
नोवामुंडी : नोवामुंडी बाजार स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है. विद्यालय में कमरों की कमी के कारण कंप्यूटर और सिलाई-कढ़ाई की पढ़ाई सात वर्षों से बंद है. वहीं विद्याथी बरामदे और कक्षा में खड़े होकर पढ़ने को विवश है. इसके कारण गरमी में परेशानी होती है. हालांकि सरकार ने यहां नौ कंप्यूटर और एक जेनरेटर उपलब्ध कराया है, जबकि कक्षा के अभाव में विद्यार्थियों का इसका लाभ नहीं मिल रहा है. छात्रों का कौशल विकास का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है.
किचन व शौचालय उपयोग के लायक नहीं : विद्यालय का किचेन जर्जर है. इसके कारण बरामदे में मध्याह्न भोजन बनता है. वहीं शौचालय की स्थिति दयनीय है.
आठवीं तक की पढ़ाई सिर्फ छह कमरों में :स्कूल में दस वर्ष से कक्षा की समस्या है. 40 विद्यार्थियों की क्षमता वाले कमरों में 107 विद्यार्थी किसी तरह पढ़ाई करने को विवश हैं. पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए केवल छह कमरे हैं. छह कमरों में 629 बच्चे पढ़ते हैं. इस कारण बच्चे वर्ग में खड़े होकर पढ़ने को विवश है. स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए एक पारा शिक्षक समेत नौ शिक्षक पदस्थापित हैं.
2005 से है कमरों की समस्या
स्कूल में वर्ष 1964 में भवन निर्माण टिस्को ने कराया था. 2005 से भवन जर्जर होने के बाद पढ़ाई प्रभावित हो रही है. वर्ष 2007 में सरकार ने यहां 22 लाख की लागत से छह कमरों वाला दो मंजिला भवन बनाया, लेकिन यह भी कम पड़ना लगा. स्कूल का नया भवन घटिया निर्माण की भेंट चढ़ गया है. बारिश में कमरों से पानी टपकता है. दीवारों में दरार पड़ गयी है.
छठी कक्षा में सबसे अधिक 107 बच्चे : फिलहाल स्कूल की छठी कक्षा में सबसे अधिक बच्चे हैं. तीसरी से 8वीं तक प्रत्येक वर्ग में बच्चों की संख्या 50 से अधिक है. तीसरे वर्ग में 73, चतुर्थ वर्ग में 59, पांचवीं में 82, छठी में 107, सातवीं में 99 और आठवीं वर्ग में 99 बच्चे नामांकित हैं.
राजकीय मध्य विद्यालय में कमरों का अभाव, सात साल से कंप्यूटर की पढ़ाई बंद
बच्चों की बढ़ती संख्या के अनुसार स्कूल के कमरे अपर्याप्त हैं. क्षेत्रीय विधायक गीता कोड़ा व टाटा-स्टील(ओएमक्यू) महाप्रबंधक को मांगपत्र सौंप कर छात्र हित में भवन निर्माण की मांग की गयी है.
– बासमती जोजो, प्रधानाध्यापिका
प्रबंधन समिति की बैठक में जर्जर भवन निर्माण का प्रस्ताव पास हुआ है. इसे स्वीकृति के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया है. स्वीकृति मिलते ही भवन निर्माण शुरू होगा. – चित्रलेखा देवी, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी
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