ऐ इमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किये गये हैं रमजान पर विशेष

Updated at : 08 Jun 2016 12:04 AM (IST)
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ऐ इमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किये गये हैं रमजान पर विशेष

चक्रधरपुर : कुरआन पाक में इरशाद है ऐ इमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किये गये हैं. ये इमान वाले हम इनसान हैं. अगर इनसान पर रोजे फर्ज है, तो अक्ल व इंसाफ का तकाजा यही है कि जिस्म इंसानी का जोड़-जोड़ रोजादार होना चाहिए. जिस्म का कोई हिस्सा रोजा की गिरफ्त से आजाद नहीं […]

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चक्रधरपुर : कुरआन पाक में इरशाद है ऐ इमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किये गये हैं. ये इमान वाले हम इनसान हैं. अगर इनसान पर रोजे फर्ज है, तो अक्ल व इंसाफ का तकाजा यही है कि जिस्म इंसानी का जोड़-जोड़ रोजादार होना चाहिए. जिस्म का कोई हिस्सा रोजा की गिरफ्त से आजाद नहीं हो. हजरत अबू हुरैरह (रजि) की रवायत जो इब्न माजा (रजि) ने नक्ल की है. इस मौके के लिए खास अहमियत रखता है.

हजरत मोहम्मद सल्लल्लाह अलैह व सल्लम फरमाते हैं बहुत से रोजेदार ऐसे हैं जिन्हें भूखा रहने के अलावा कुछ नहीं मिलता और बहुत से शब बेदार (रात जागने वाला) ऐसे हैं जिन्हें रात के जागने की थकान के अलावा कुछ नहीं आता. इस रवायत हदीस पर ओलेमा व मोहद्देसीन की खास तवज्जा रही है. इस महरूम शख्स से हराम गिजा खाने वाला रोजेदार मुराद हैं. रोजा की सेहरी में हराम गिजा खाई गयी हो, रोजा का इफ्तार हराम गिजा से किया गया हो.

गौर करने की बात है ऐसे रोजे की क्या हैसियत हो सकती है और इनसान के किरदार पर ऐसे रोजे का क्या असर कायम हो सकता है. इसलिए रोजा में तकवा व रास्त किरदार हासिल करने के लिए गिजा का जायज व हलाल होना शर्त है.

ऊपर बयान किये गये हदीस से कुछ लोगों की मुराद गीबत करने वाला शख्स भी है. अल्लाह के रसूल से जब पूछा गया गीबत क्या है. रसूल अल्लाह ने इरशाद फरमाया पसे पुस्त किसी की ऐसी बातें बयान करना कि अगर बात वाले को मालूम हो तो उसे नागवार मालूम हो. पूछा गया या रसूल अल्लाह अगर उसमें वह बात मौजूद होगी, यानि उसकी हकीकत उसके पीठ के पीछे कहा जाये तो गीबत नहीं होगी. अल्लाह के रसूल ने फरमाया वह बात इसमें मौजूद होगी तब ही गीबत होगी, वरना तोहमत और इल्जाम है. इस तरह मालूम हुआ कि सच्ची बात हो और उसके पीठ के पीछे कही गयी हो जो सुनने के बाद उसे नागवार गुजरे वह बात गीबत है. लेकिन आज हमारी आदत में शुमार है कि हम दूसरों की बातें उसके पीठ के पीछे कह रहे हैं. गोया हर दिन हर वक्त गीबत कर रहे हैं. हजरत मोहम्मद सल्लल्लाह अलैह व सल्लम के अजवाज ए मोतहरात में हजरत हफसा (रजि) पिस्ता कद थीं. एक बार हजरत आयशा (रजि) ने आप (स.) से हजरत हफसा (रजि) के पसे पुस्त फरमाया हफसा (रजि) तो ऐसी हैं और हाथ से उसके पिस्ता कद होने का इशारा भी कर दिया. यह सुन कर रसूल अल्लाह ने फरमाया आयशा (रजि) तुम ने ऐसी कड़वी बात कही है कि इस बात को समंदर में डाल दिया जाये तो समंदर कड़वा हो जायेगा.

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