अनाथ को ‘मां’ का प्यार देने के लिए लग गयी लाइन

चक्रधरपुर : खरसावां रोड कियापता गांव की झाड़ियों में जिस एक दिन के नवजात को फेंक दिया गया था रेलवे अस्पताल में वह इलाजरत है. उस को अपनाने के लिए कई ‘मां’ सामने आयी हैं. बच्चे को गोद लेने के लिए चक्रधरपुर, जमशेदपुर व कोलकाता से कई दंपति चक्रधरपुर रेलवे अस्पताल में चक्कर लगा रहे […]
चक्रधरपुर : खरसावां रोड कियापता गांव की झाड़ियों में जिस एक दिन के नवजात को फेंक दिया गया था रेलवे अस्पताल में वह इलाजरत है. उस को अपनाने के लिए कई ‘मां’ सामने आयी हैं.
बच्चे को गोद लेने के लिए चक्रधरपुर, जमशेदपुर व कोलकाता से कई दंपति चक्रधरपुर रेलवे अस्पताल में चक्कर लगा रहे हैं. नवजात शिशु आइसीयू में है. मालूम रहे कि विगत दिन खरसावां रोड कियापता गांव में एक मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को पैदा होने के बाद सड़क किनारे स्थित झाड़ियों में फेंक दिया था.
झाड़ियों से बच्चे की रोने की आवाज गांव की अनिता जामुदा को सुनायी दी. उसने शिशु को झाड़ियों से बाहर लाकर एकजुट संस्था के सदस्यों की मदद से तत्काल रेलवे अस्पताल लायी. जहां बच्चे का उपचार हुआ.
वर्तमान में बच्च पूरी तरह स्वस्थ है. एक मां ने शिशु से नाता तोड़ा तो उसके परवरिश करने के लिए कई मां तैयार खड़ी हैं. देखना है कि बच्च किस घर में पलता बढ़ता है. चक्रधरपुर नगर पर्षद क्षेत्र वार्ड संख्या 4 निवासी गीतू प्रमाणिक व जमशेदपुर से हुमा नाज सुबह से बच्चे को गोद लेने के लिए एक मिनट भी अस्पताल से नहीं हटी. वर्तमान में शिशु की देखभाल कर रही अनीता जामुदा ने कहा कि वह बच्च को पालना चाहती है. लेकिन पति इंकार कर रहे हैं.
अनिता ने कहा कि बच्च को जब तक कोई गोद नहीं ले लेता, तब तक अस्पताल में रह कर देखभाल करती रहेगी. डॉक्टर के मुताबिक शिशु को स्वस्थ होने में अभी दो तीन दिन का वक्त और लगेगा. रेलवे अस्पताल में खड़ी गीतू प्रमाणिक व हुमा नाज ने कहा कि उनकी शादी हुए छह सात साल हो गया. लेकिन संतान सुख से वह वंचित है. दोनों परिवार बच्चे को काफी लाड़ प्यार से पालने की बात कह रहे हैं.
देर शाम गीतू प्रमाणिक ने इस संबंध में चक्रधरपुर थाना में आवेदन दिया है. इस बारे में विधायक ने भी अपनी अनुशंसा कर दी है. अब शुक्रवार को शेष प्रक्रिया पूरी की जायेगी. इसके बाद ही बच्चे के नामाकरण की प्रक्रिया भी पूरी की जायेगी.
इस बारे में रेलवे अस्पताल के डॉ पी बख्शी ने कहा कि बच्चे के इलाज पर अभी रेलवे अस्पताल प्रशासन खर्च कर रहा है, लेकिन यदि कोई पूरा खर्च वहन कर देता है तो उसको बच्च दिया जा सकता है.
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