अभियान में फंसी बच्चों की जान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Apr 2015 1:12 AM (IST)
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स्कूल चलें-चलायें अभियान के लिए बदला गया स्कूलों का समय मनोज कुमार, चाईबासा सूरज तप रहा है. धरती जल रही है. पारा 44 डिग्री के आसपास है. हर पल मौसम का मिजाज बदल रहा है. इस बदलते मौसम में बड़े लोग घर से नहीं निकल पा रहे हैं. और पश्चिमी सिंहभूम में सभी सरकारी स्कूलों […]
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स्कूल चलें-चलायें अभियान के लिए बदला गया स्कूलों का समय
मनोज कुमार, चाईबासा
सूरज तप रहा है. धरती जल रही है. पारा 44 डिग्री के आसपास है. हर पल मौसम का मिजाज बदल रहा है. इस बदलते मौसम में बड़े लोग घर से नहीं निकल पा रहे हैं. और पश्चिमी सिंहभूम में सभी सरकारी स्कूलों में 1 से 8 तक के क्लास सुबह नौ बजे से दोपहर के तीन बजे तक कर दिये गये हैं.
यानी तपती दोपहरी और गरम लू के बीच बच्चों को स्कूल में रहना होगा. जाहिर सी बात है कि जब इस गरमी में बड़े-बड़े लोग हांफते नजर आ रहे हैं. तो बच्चों पर क्या बीतेगी. गौर करने वाली बात है कि स्कूलों के समय में यह परिवर्तन विद्यालय चलें, चलायें अभियान के कारण किया गया है. अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि तपती धूप में बच्चे किस प्रकार स्कूल में टिक सकेंगे.
डीसी के आदेश से डीएसइ ने जारी किया है आदेश
स्कूलों के समय में परिवर्तन करने का आदेश डीसी के आदेश से डीएसइ ने निर्गत किया है. आदेश में स्पष्ट है कि विद्यालय चलें, चलायें अभियान के कारण स्कूलों में पठन-पाठन व अभियान का कार्य 21 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सुबह नौ बजे से तीन बजे तक चलेगा.
अभियान में बच्चों का रोल
स्कूली बच्चों की ओर से विद्यालय चलें, चलायें अभियान में रैली निकाली जा रही है. स्कूल जाने वाले बच्चे ही स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों के घर जाकर अभिभावकों को समझा रहे हैं. हालांकि ये कवायद अच्छी है. पर, दूसरा पहलू बच्चों का स्वास्थ्य भी है, जिसे अभियान के नाम पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
2292 स्कूलों में पढ़ते हैं एक लाख 97 हजार बच्चे
जिले के कुल 2292 स्कूलों में कुल 1 लाख 97 हजार 650 बच्चों का नामांकन है. इनमें से 1 लाख 47 हजार पांच सौ पचास कक्षा 1 से 5 वर्ग में पढ़ते हैं. वहीं 50 हजार एक सौ पचास छात्र-छात्राओं का नामांकन है.
बच्चों में डिहाइड्रेशन का है खतरा : ड़ॉ पांडेय
सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ वीके पांडेय का कहना है कि पारा चढ़ा हुआ है. बच्चों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक है. डिहाइड्रेशन होने पर लूज मोशन और डायरिया का खतरा बढ़ जायेगा. ऐसे में तेज धूप में बच्चों को घर से नहीं निकलना चाहिए.
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