रितिका को मिला सहारा, सपानी फिर बेसहारा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Apr 2015 8:20 AM (IST)
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टूट गयी आस : 20 दिन इलाज के बाद पैसे के अभाव में सपानी को घर ले आये परिजन जिंदगी और मौत के बीच जंग लड रही सपानी एक बार फिर से बेसहारा हो गयी है. पति व सास की प्रताड़ना की शिकार गरीब सपानी को पश्चिम सिंहभूम प्रशासन की पहल पर जमशेदपुर के महात्मा […]
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टूट गयी आस : 20 दिन इलाज के बाद पैसे के अभाव में सपानी को घर ले आये परिजन
जिंदगी और मौत के बीच जंग लड रही सपानी एक बार फिर से बेसहारा हो गयी है. पति व सास की प्रताड़ना की शिकार गरीब सपानी को पश्चिम सिंहभूम प्रशासन की पहल पर जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल (एमजीएम) में भर्ती कराया गया था. यहां 20 दिन तक उसका इलाज चला. परिजनों के मुताबिक अस्पताल में जो दवा उपलब्ध थी वह उन्हें दी गयी.
अन्य जरूरी दवा उन्हें स्वयं खरीद कर लानी पड़ती थी. गरीबी के कारण उनके पास उपलब्ध रुपये खत्म हो गये थे. कहीं से मदद की आस नहीं दिख परिजनों ने घर लौटने निर्णय ले लिया. उधर कैंसर से जूझ रही बंदगांव निवासी रितिका मुखी को चक्रधरपुर विधायक शशि सामड का सहारा मिल गया है. उनकी पहल पर प्रशासन ने रितिका के इलाज के लिए 2.40 लाख रुपये उपलब्ध कराया है. अब उसका इलाज रांची में विशेषज्ञ अस्पताल में किया जा सकेगा.
चाईबासा : 20 दिनों तक एमजीएम में इलाज कराने के बाद सपानी अपने घर लौट गयी. पैसा के अभाव में परिजनों ने उसे घर पर रखकर ही इलाज कराना बेहतर समझा. सपानी की देखरेख में गये उनके परिजनों की गरीबी का आलम ये था कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे. बिना खाये-पीये सपानी की देखरेख भी संभव नहीं था. ऐसे में घर लौटने के सिवा कोई चारा नहीं था. पश्चिमी सिंहभूम प्रशासन की ओर से उसे कल्याण विभाग की ओर से दस हजार रुपये की सरकारी सहायता राशि देने की घोषणा जरूर की गयी लेकिन यह राशि मिली नहीं. बताया जा रहा है कि राशि का पहल भी अब तक कागजी प्रक्रिया में उलझकर रह गया है. इसका असर रहा कि सपानी एक बार फिर से भगवान भरोसे घर लौट आयी है.
आज मिलेंगे सपानी को 10 हजार : एडीसी
एडीसी अजीतशंकर ने कहा है कि प्रपत्र फॉर्म में आवदेन नहीं दिया गया था. आवेदन बीडीओ के पास है. बीडीओ उसमें सपानी का बीपीएल नंबर चढ़ाने की कार्रवाई कर रहे हैं. आज किसी भी हाल में उसे दस हजार का चेक दे दिया जायेगा.
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