ग्रामीणों ने खाली कराया कैंप

ईचा–खड़कई बांध के विरोध में उतरे 126 गांव के लोग चाईबासा : ईचा–खड़काई डैम विरोधी संघ के भारी विरोध के बीच सोमवार को स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के तहत बुरुजल में डैम निर्माण कर रही कंस्ट्रक्शन कंपनी को कैंप खाली करना पड़ा. डैम बनने से प्रभावित लगभग 126 गांवों के लोग कंस्ट्रक्शन कंपनी को बोरिया बिस्तर […]
ईचा–खड़कई बांध के विरोध में उतरे 126 गांव के लोग
चाईबासा : ईचा–खड़काई डैम विरोधी संघ के भारी विरोध के बीच सोमवार को स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के तहत बुरुजल में डैम निर्माण कर रही कंस्ट्रक्शन कंपनी को कैंप खाली करना पड़ा. डैम बनने से प्रभावित लगभग 126 गांवों के लोग कंस्ट्रक्शन कंपनी को बोरिया बिस्तर बांधकर बुरुजल से जाने की मांग पर अड़े हुए थे.
आंदोलनकारियों की मांग थी कि निर्माण कार्य से जुड़े जितने भी मशीन और गाड़ियां स्थल पर उसे तत्काल हटाया जाये. आंदोलनकारी किसी से वार्ता नहीं करने को तैयार नहीं थे.
परंपरागत हथियारों के साथ स्थल पर आये आंदोलनकारियों ने कंस्ट्रक्शन कंपनी के सुपरवाइजर को घेरे में ले रखा था. वे सुपरवाइजर से कंपनी के ठेकेदार को बुलाने की मांग कर रहे थे. सुपरवाइजर द्वारा बार–बार कंपनी के अधिकारियों और ठेकेदारों को फोन किया गया, वे विभाग के किसी एसडीओ के मौके पर पहुंचने की बात बार–बार कहते रहे.
अंत में काफी देर हो जाने के बाद आंदोलनकारियों का सब्र का बांध टूट गया और वे सुपरवाइजर को मारने–पीटने की धमकी देने लगे.
बढ़ते तनाव के बीच कंपनी के किसी ठेकेदार ने ड्राइवर को बुलाकर कैंप से गाड़ी हटाने का काम शुरू किया गया. कैंप में रखे अन्य निर्माण मशीन और औजार को भी तीन दिनों के अंदर खाली करने के अल्टीमेटम पर छोड़ा गया. ग्रामीणों ने स्थल पर सरकार विरोधी नारे भी लगाये. बिना ग्राम सभा के नहर निर्माण का विरोध किया. आंदोलनकारियों की ओर से रोमी, शिव शंकर सुम्बरूई, संदीप काफी उग्र तेवर अपनाये हुए थे.
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