पांच हजार की आबादी पर गहराया जल संकट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 May 2019 12:46 AM
चाईबासा : तोडांगहातु पंचायत अंतर्गत कुंदरीझोर गांव में जल संकट गहरा गया है. जहां तालाब, कुआं, चूआं आदि सूखने के कगार पर हैं. वहीं पीने का पानी देनेवाला चापाकल भी दम तोड़ रहा है. जल संकट का आलम यह है कि कुछ जगहों पर तो लोग तालाब व कुओं का दूषित जल पीने को ग्रामीण […]
चाईबासा : तोडांगहातु पंचायत अंतर्गत कुंदरीझोर गांव में जल संकट गहरा गया है. जहां तालाब, कुआं, चूआं आदि सूखने के कगार पर हैं. वहीं पीने का पानी देनेवाला चापाकल भी दम तोड़ रहा है. जल संकट का आलम यह है कि कुछ जगहों पर तो लोग तालाब व कुओं का दूषित जल पीने को ग्रामीण विवश हैं.
इस गांव की आबादी करीब पांच हजार है. यह गांव चार टोले में विभाजित है जिसमें जोड़ापोखर, पुंडीगुटू, कुंदरीझोर व कोलोमसाई शामिल हैं. कुंदरीझोर टोले की आबादी करीब दो हजार है.
इसके बावजूद यहां पर्याप्त संख्या में चापाकल नहीं हैं. छह सरकारी चापाकलों में से चार मरम्मत के अभाव में खराब पड़े हैं. बाकी दो चापाकल चालू तो हैं, पर उनका पानी खारा होने की वजह से पीने लायक नहीं है. दो कुएं हैं पर एक का पानी सूख चुका है. यहां सिर्फ एक तालाब है. कोलोसाई टोले की आबादी करीब एक हजार है. यहां दो में से एक चापाकल खराब पड़ा है. सिर्फ एक कुआं है वह भी सूख चुका है.
यहां एक भी तालाब नहीं है. पुंडीगुट्टू की आबादी करीब 500 है. यहां दो में से एक चापाकल खराब पड़ा है. यहां न तो कुआं है और न ही तालाब. यहां पानी की समस्या गंभीर है. गांव के श्रीनिवास तिरिया का कहना है कि गांव में वैसे तो सालोंभर पेयजल संकट छाया रहता है, जिससे उन्हें एक किमी दूर पहाड़ी की तराई में बने चुएं से पानी लाना पड़ता है. मोटाय तिरिया का कहना है कि गांव में जल संकट पुराना है. गर्मी में समस्या गंभीर हो जाती है.
गीता तिरिया का कहना है कि पानी की किल्लत से अधिक परेशानी महिलाओं को ही होती है, क्योंकि हमें दूर जाकर पानी लाना पड़ता है. भजमति तिरिया का कहना है कि उन्हें पीने का शुद्ध पानी तो दूर पानी ही नसीब नहीं है. जनप्रतिनिधि इस समस्या के समाधान में रुचि नहीं लेते हैं.
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