एक लाख के इनामी माओवादी रामेश्वर ने किया सरेंडर

Updated at : 17 Jan 2018 4:04 AM (IST)
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एक लाख के इनामी माओवादी रामेश्वर ने किया सरेंडर

किरीबुरू : आठ साल की उम्र से माओवादियों के लिये काम कर रहे कुख्यात माओवादी रामसाय मुंडा उर्फ रामेश्वर (20) ने मंगलवार को ओड़िशा की राउरकेला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. सुंदरगढ़-देवगढ़-संबलपुर (एसडीएस) जोनल कमेटी के मारक दस्ते के सदस्य रामेश्वर पर ओड़िशा सरकार ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. […]

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किरीबुरू : आठ साल की उम्र से माओवादियों के लिये काम कर रहे कुख्यात माओवादी रामसाय मुंडा उर्फ रामेश्वर (20) ने मंगलवार को ओड़िशा की राउरकेला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. सुंदरगढ़-देवगढ़-संबलपुर (एसडीएस) जोनल कमेटी के मारक दस्ते के सदस्य रामेश्वर पर ओड़िशा सरकार ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.

रांची जिले के बुंडू थाना अंतर्गत गोबाडीही के बड़ा टोला निवासी पहाड़ सिंह मुंडा के बेटे रामसाय ने 12 सालों तक माओवादियों के विभिन्न अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा पुलिस के साथ हुए कई मुठभेड़ में शामिल रहा. पिछले दिनों उसने संगठन से अपनी मां से मिलने व बुंडू स्थित अपने गांव का घर देखने के बहाने छुट्टी ली और वहां से भागकर ओड़िशा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.
2004 में जब उसने भाकपा माओवादी का दामन थामा तब उसकी उम्र आठ साल थी. कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन (जो खुद आत्मसमर्पण कर चुका है) उसे शिक्षा, भोजन व पैसा उपलब्ध कराने के नाम पर अपने साथ ले गया था. रामसाय को माओवादियों के सांस्कृतिक दस्ते में साल 2012 तक रखा गया. इसके बाद उसे कोल्हान के जंगल में छत्तीसगढ़ के कुख्यात नक्सली नीलाभ के अधीन रखकर अत्याधुनिक हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिलाया गया. बाद में उसे एसएलआर देकर नक्सली नेता अनमोल दा के साथ एसडीएस जोनल कमेटी में भेज दिया गया. साल 2015 में संबलपुर के दंडटेका में हुई पुलिस के साथ मुठभेड़ में वह शामिल रहा. वर्ष 2015 के आखिरी महीने में वह पुनः सारंडा आया और नक्सल गतिविधियों में शामिल हो गया.
आठ साल की उम्र से नक्सलियों के लिए कर रहा था काम
मां से मिलने और गांव देखने के बहाने संगठन से छुट्टी लेकर पुलिस के पास पहुंचा
कुंदन पाहन ने शिक्षा, भोजन, व पैसे का लालच देकर संगठन में कराया था शामिल
मौत के डर से संगठन छोड़ रहे कैडर : रामेश्वर
रामसाय ने बताया कि पुलिस व सीआरपीएफ द्वारा निरंतर ऑपरेशन चलाये जाने से नक्सल कैडरों का अस्तित्व पर खतरा बढ़ा है. अनेक नक्सली मौत के डर से संगठन छोड़ रहे हैं. खाली हो रही जगह को भरने के लिए जबरन मासूम युवक-युवतियों को संगठन में शामिल कराया जा रहा है. उसने कहा कि माओवादी अपने सिद्धान्त व विचारधारा से भटक गये हैं. वे युवाओं को शिक्षा, पैसा, भोजन आदि का झूठा प्रलोभन देकर उन्हें संगठन में शामिल करते है, लेकिन कुछ नहीं दिया जाता. निर्दोष लोगों की हत्या, महिलाओं का शोषण आदि संगठन के उच्च लोगों द्वारा किया जाता है. इन्हीं सब बातों से खफा होकर उसने संगठन छोड़कर भाग खड़ा हुआ और आत्मसमर्पण किया.
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