हाथियों ने 11 घरों को तोड़ा, लोगों ने जंगल में भागकर बचायी जान

Updated at : 05 Jan 2018 6:18 AM (IST)
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हाथियों ने 11 घरों को तोड़ा, लोगों ने जंगल में भागकर बचायी जान

किरीबुरू : नक्सल प्रभावित सारंडा की छोटानागरा पंचायत अंतर्गत जोजोगुट्टू गांव और चाईबासा से सटे चलियामा गांव में बुधवार की रात हाथियों ने 11 ग्रामीणों के घरों को तोड़कर अंदर रखा अनाज खा गये. हाथियों के भय से उक्त परिवार के लोगों ने जंगल में भागकर जान बचायी. बच्चे डरे हुए हैं. जोजोगुट्टू गांव में […]

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किरीबुरू : नक्सल प्रभावित सारंडा की छोटानागरा पंचायत अंतर्गत जोजोगुट्टू गांव और चाईबासा से सटे चलियामा गांव में बुधवार की रात हाथियों ने 11 ग्रामीणों के घरों को तोड़कर अंदर रखा अनाज खा गये. हाथियों के भय से उक्त परिवार के लोगों ने जंगल में भागकर जान बचायी. बच्चे डरे हुए हैं.

जोजोगुट्टू गांव में पिछले चार दिनों से हाथियों का आतंक है. 25 से 30 की संख्या में हाथियों के झुंड ने लक्ष्मण आइंद, मंगल बलमुचु, ठाकुर बलमुचु के मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया. घर में रखे धान चट कर गये. यही नहीं, हाथियों ने घर में रखे बर्तन आदि सामानों को तोड़ दिया. इस दौरान लोगों ने परिजनों के साथ जंगल में भागकर जान बचायी. डर के मारे लोगों को कड़ाके की ठंड में जंगल में रात बितानी पड़ी. गांव की तमाम महिलाओं, बच्चों व वृद्धों ने पास के स्कूल में जाकर रतजगा किया. घटना की सूचना पाकर छोटानागरा थाना प्रभारी सत्यवीर सिंह और गुवा वन विभाग के कर्मचारियों ने घटनास्थल का जायजा लेते हुए हाथियों के हमले में हुई क्षति का आकलन किया. सारे अधिकारी हाथियों से बचाव के लिए जरूरी निर्देश देकर तथा पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाकर गांव से चले गये.
ग्रामीणों ने हाथियों को स्वयं भगाने का उठाया बीड़ा: हाथियों के निरंतर हमलों के बाद भी वन विभाग के सक्रिय नहीं होने से नाराज जोजोगुट्टू, जामकुंडिया, राजाबेड़ा और बाईहातु गांवों के सैकड़ों निवासी खुद से हाथियों को भगाने की तैयारी कर ली है. ग्रामीण पारंपरिक हथियारों, जैसे नगाड़ा, पटाखे आदि के साथ हाथियों के डेरा जमानेवाले जंगल में घुस गये हैं. उनका कहना है कि वे हाथियों को इस क्षेत्र से भगायेंगे, हालांकि इस दौरान हाथियों को कोई क्षति नहीं पहुंचाई जायेगी. हाथियों के भगाने निकले दल में सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम, पूर्व जिप सदस्य बामिया मांझी, मुंडा कानूराम देवगम, राजेश सांडिल आदि शामिल हैं.
चलियामा में हाथियों का आतंक,
चाईबासा से सटे चलियामा गांव में बुधवार की रात सरायकेला की ओर से घुसे आठ हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया. रात करीब साढ़े 12 बजे हाथियों का झुंड गांव में घुसा. हाथियों ने गांव के आठ लोगों के घरों को तोड़ दिया. इससे गांव में दहशत का माहौल रहा. डर से घर छोड़कर ग्रामीण भागने लगे. कुछ लोगों ने साहस दिखाते हुये हाथियों को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन हाथी टस से मस नहीं हुये. आठ ग्रामीणों के घर से धान खाने के बाद भोर को हाथी गांव से निकल गये. हाथियों ने वार्ड सदस्य नुतन जोंको, डुबदी जोंको, शंकर बानरा, सुरेश कालुंडिया, पेन जोंको, रतन, फिरोज महतो व मुन्नी जोंको घर को तोड़ा गया है. घर में रखे धान को हाथियों ने चट कर लिया है. उधर, घटना की सूचना पाने के बाद मुखिया रूची जारीका ने गुरुवार को गांव का दौरा किया. उन्होंने मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है.
बंगाल के बाद अब ओड़िशा से आया हाथियों का झुंड
इन दिनों पूरे कोल्हन (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले) में लगातार हाथी तबाही मचा रहा है. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ओडिशा के रास्ते बड़ी संख्या में हाथी कोल्हान क्षेत्र में आ चुका है. वहीं इससे पहले ही बंगाल से हाथी यहां आ चुके हैं. बंगाल सरकार द्वारा खाई खाई बना दिये जाने से हाथियों ने अपना रास्ता दलमा से निकलकर सरायकेला-खरसावां जिले को पार करते हुए चाईबासा के जंगलों से होकर ओडिशा की चले जा रह हैं या फिर कोल्हान एरिया में ही वे लोग विचरण कर रहे हैं. महुआ कई एरिया में घरों में स्टॉक कर रखा गया है. इसकी महक हाथियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, जबकि धान की खेती और उसके भंडारण के कारण भी ऐसा हो रहा है.
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