समाहरणालय में बनेगा म्यूजियम, चलेगा एसडीओ कार्यालय

Updated at : 03 Jan 2018 2:44 AM (IST)
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समाहरणालय में बनेगा म्यूजियम, चलेगा एसडीओ कार्यालय

कोल्हान मुख्यालय चाईबासा में कई हेरिटेज संपत्तियां हेरिटेज विभाग करेगा इन भवनों के संरक्षण काम जिले में पर्यटन के लिए नये केंद्र का होगा विकास स्मारक का स्थापत्य मूल स्वरूप में होगा संरक्षित चाईबासा : ऐतिहासिक धरोहर घोषित होने के बाद पश्चिमी सिंहभूम का समाहरणालय भवन व जिला जज कार्यालय को राज्य सरकार संजोयेगी. राजा-रजवाड़ों […]

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कोल्हान मुख्यालय चाईबासा में कई हेरिटेज संपत्तियां

हेरिटेज विभाग करेगा इन भवनों के संरक्षण काम
जिले में पर्यटन के लिए नये केंद्र का होगा विकास
स्मारक का स्थापत्य मूल स्वरूप में होगा संरक्षित
चाईबासा : ऐतिहासिक धरोहर घोषित होने के बाद पश्चिमी सिंहभूम का समाहरणालय भवन व जिला जज कार्यालय को राज्य सरकार संजोयेगी. राजा-रजवाड़ों से लेकर अंग्रेजी शासनकाल के दौर तक के इन पुराने भवनों का अब नियमित रख-रखाव किया जायेगा. हेरिटेज बिल्डिंग घोषित समाहरणालय में म्यूजियम बनेगा, यहां जिले में खुदाई के दौरान मिली वस्तुएं प्रदर्शनी के रूप में रखी जायेंगी. हालांकि इसके साथ इसमें सदर एसडीओ का कार्यालय भी चलेगा.
1947 के पहले निर्मित सभी इमारतें सूचीबद्ध : कोल्हान मुख्यालय पश्चिम सिंहभूम में कई हेरिटेज संपत्तियां हैं, जिनमें अधिकांश ब्रिटिश कालीन भवन हैं. अधिकतर में सरकारी कार्यालय चल रहे हैं. ऐतिहासिक धरोहर घोषित होने के बाद इन भवनों के संरक्षण की योजना को हेरिटेज विभाग मूर्त रूप देगा. भवनों के संरक्षण से पहले अत्याधुनिक थ्री डी लेजर स्कैनिंग तकनीक से यह पता लगाया जायेगा कि किन हिस्सों में संरक्षण का क्या और कितना काम किया जायेगा,
ताकि वक्त के थपेड़ों से इमारत में आयी अति सूक्ष्म दरार और क्षरण का बिल्कुल सटीक पता चल सके. पुरातत्व कानून के मुताबिक 100 साल पुरानी इमारत को विरासत का दर्जा मिलता है. इसके साथ ही इन इमारतों की देखरेख का काम पुरातत्व विभाग के हाथों में आ जाता है. लेकिन हाल ही में भारत सरकार ने 1947 के पहले निर्मित सभी इमारतों को विरासत भवन की श्रेणी में सूचीबद्ध कर दिया है.
पर्यटकों को ब्रिटिशकाल की वास्तुकला की भव्यता की झलक : इन दोनों भवनों को धरोहर घोषित किये जाने के कारण जिले में पर्यटन गितिविधियों के लिए नये क्षेत्र विकसित होंगे. इन भवनों के संरक्षण के जरिये पर्यटकों को रियासत काल की जीवन शैली, परंपराओं और ब्रिटश काल की वास्तुकला की भव्यता की झलक दिखने को मिलेगी. इतना ही नहीं, यहां आनेवाले पर्यटकों को इतिहास और संस्कृति विरासत की भी जानकारी भी दी जायेगी.
स्मारक का मूल स्थापत्य कला का होगा संरक्षण : पजिले के प्राचीन स्मारकों के साथ प्रकृति के मोहक नजारे सैलानियों को लुभाते हैं. लेकिन संरक्षण के अभाव में जिले की प्राचीन इमारतें अनियोजित विकास में पहचान खो रही हैं. अब इनके संरक्षण को मंजूरी मिलने के बाद स्मारक के स्थापत्य को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा, ताकि उनका वास्तविक रूप बना रहे. इन धरोहरों की साइंटिफिक सूची तैयार की जाएगी, जिससे शोध संभव हो सके.
पुराना समाहरणालय व जिला जज के कार्यालय को ऐतिहासिक धरोहर की मान्यता मिलेगी. इससे जिले में पर्यटन गतिविधियों के लिए नये क्षेत्र विकसित होंगे. समाहरणालय में म्यूजियम खोला जायेगा. हालांकि यहां एसडीओ कार्यालय भी चलता रहेगा.
– अरवा राजकमल, उपायुक्त पश्चिम सिंहभूम
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