नक्सली बंदी में माइंस रहे बंद, 20 करोड़ का कारोबार प्रभावित
Updated at : 21 Dec 2017 5:27 AM (IST)
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सड़कों पर थमे वाहनों के पहिये , राहगीर रहे परेशान लंबी दूरी की बसें नहीं चलीं 700 ट्रकों के पहिए थमे रहे रेल सेवा पर असर नहीं चाईबासा/किरीबुरू : भाकपा माओवादी द्वारा बुधवार को आहूत झारखंड-बिहार बंद का पश्चिम सिंहभूम जिले में माइनिंग व परिवहन पर व्यापक असर दिखा. बंदी के कारण 20 करोड़ से […]
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सड़कों पर थमे वाहनों के पहिये , राहगीर रहे परेशान
लंबी दूरी की बसें नहीं चलीं
700 ट्रकों के पहिए थमे रहे
रेल सेवा पर असर नहीं
चाईबासा/किरीबुरू : भाकपा माओवादी द्वारा बुधवार को आहूत झारखंड-बिहार बंद का पश्चिम सिंहभूम जिले में माइनिंग व परिवहन पर व्यापक असर दिखा. बंदी के कारण 20 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है. नक्सलियों के डर से जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में 24 घंटे तक जनजीवन प्रभावित रहा. हालांकि किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है. बंद के कारण जिले की लगभग सभी निजी खदानों में उत्पादान से लेकर लोडिंग, डिस्पैच, अनलोडिंग का काम ठप रहा,
आयरन ओर ढोनेवाले 700 ट्रकों के पहिये थमे रहे, जिससे दस हजार लोग प्रभावित हुए. ट्रकों का परिचालन नहीं होने से मजदूर, खलासी, चालकों के अलावा माइंस क्षेत्र में छोटे होटल चलाने वालों का रोजगार भी ठप रहा तो लंबी दूरी की बसें भी नहीं चलीं. नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में भी यात्री बसों सहित अन्य गाड़ियों का परिवहन बंद रहा. हालांकि जरूरत के अनुसार लोगों ने निजी वाहनों व दोपहिया वाहनों से सफर किया.
रेल सेवा पर असर नहीं: बंद का रेल सेवा पर कोई असर नहीं दिखा. नक्सली क्षेत्र में पड़नेवाले 100 किमी रेल ट्रैक (चक्रधरपुर से जराइकेला) पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम के बीच परिचालन जारी रहा. बंदी को लेकर रेल प्रशासन सतर्क दिखा. रात्रि ट्रेनों पर विशेष नजर रही. ट्रेनों की गश्ती के लिए रेल पुलिस बल की संख्या बढ़ा दी गयी थी.
खुले रहे शहरों के बाजार व दुकानें
नक्सली बंद का जिले के शहरी क्षेत्रों में कोई असर नहीं दिखा. दुकानें, सरकारी कार्यालय तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान आम दिनों की तरह खुले रहे. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही न के बराबर रही, जिसका नुकसान शहरी व्यापारियों को भी उठाना पड़ा.
लगातार दो बुधवार बंद से ग्रामीणों को नुकसान: पिछले 10 दिन में लगातार दो बुधवार को नक्सली बंद से सर्वाधिक नुकसान बंदगाव और लचडागढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों को उठाना पड़ा. ईसाई बहुल दोनों क्षेत्रों में क्रिसमस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. दोनों जगह बुधवार को साप्ताहिक हाट लगती है, लेकिन लगातार दो बुधवार की बंदी ने उन्हें बुरी तरह प्रभावित किया है.
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