तीन सप्ताह से बीमार थी छात्रा

Updated at : 06 Dec 2017 7:35 AM (IST)
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तीन सप्ताह से बीमार थी छात्रा

पिता ने करवाया था इलाज, मलेरिया का पता चला था स्वास्थ्य ठीक लगने पर दोबारा स्कूल आयी थी छात्रा मनोहरपुर : मनोहरपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कक्षा नौ की छात्रा सुशांति टूटी पिछले तीन हफ्ते से बीमार थी. इलाज के बाद उसे स्वस्थ जानकर परिवार ने वापस स्कूल भेजा था. लेकिन दोबारा तबीयत […]

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पिता ने करवाया था इलाज, मलेरिया का पता चला था

स्वास्थ्य ठीक लगने पर दोबारा स्कूल आयी थी छात्रा
मनोहरपुर : मनोहरपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कक्षा नौ की छात्रा सुशांति टूटी पिछले तीन हफ्ते से बीमार थी. इलाज के बाद उसे स्वस्थ जानकर परिवार ने वापस स्कूल भेजा था. लेकिन दोबारा तबीयत बिगड़ने के करीब 24 घंटे बाद उसने दम तोड़ दिया. सुशांति के पिता जकरियस टूटी के मुताबिक विगत 15 नवंबर के पूर्व विद्यालय से उन्हें फोन कर बताया गया ता की उनकी बेटी बीमार है. जकरियस विद्यालय आये और बेटी को लेकर अपने गांव गुल्लू चले गये. गांव जाने से पूर्व उन्होंने मनोहरपुर के एक नर्सिंग होम में अपनी बेटी के रक्त की जांच करायी जहां पैथोलॉजी चलाने वाले व्यक्ति ने सुशांति को मलेरिया होने की बात कहते हुए रिपोर्ट सौंपी.
पैथोलॉजी संचालक ने एक इंजेक्शन व कुछ दवा भी दी थी. इसके बाद जकरियस ने आनंदपुर के साहूबेड़ा में एक ग्रामीण चिकित्सक से सुशांति का इलाज कराया. परिजन जब सुशांति के स्वास्थ्य के प्रति आश्वस्त हुए तब 26 नवंबर को उसे स्कूल पहुंचा दिया. इस बीच जकरियस ने रविवार को स्कूल पहुंचकर बेटी से मुलाकात की थी और स्वास्थ्य की जानकारी ली थी तो वह पूरी तरह स्वस्थ थी.
अभिभावक से लेकर स्कूल प्रबंधन तक, सबकी लापरवाही : सुशांति घर से लेकर स्कूल तक लापरवाही का शिकार हो गयी. नवंबर के दूसरे सप्ताह में जब उसकी तबीयत खराब हुई तो वार्डन ने उसका इलाज नहीं कराया, बल्कि छात्रा के पिता को स्कूल बुलाकर छात्रा को छुट्टी दे दी. वह अब इसके लिए शिक्षकों की कमी का हवाला दे रही हैं. ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले जकरियस टूटी को मनोहरपुर के अस्पताल/चिकित्सक के बारे में अनुभव की कमी थी. वे एक निजी चिकित्सालय मे झोलाछाप चिकित्सक से मलेरिया की सुई दवा लेकर वापस घर चले गये. घर जाकर भी ग्रामीण चिकित्सक से इलाज कराया और बेटी को पुनः स्कूल पहुंचा दिया.
दोबारा तबीयत बिगड़ने पर प्रबंधन ने बरती लापरवाही
अनधिकृत रूप से स्कूल छोड़ घर में थी वार्डन
सोमवार की सुबह सुशांति की तबीयत बिगड़ने के बाद वार्डन ने सिर्फ दवा दे दी और शाम को अपने घर चली गयी. रात में विद्यालय की 375 छात्रायें शिक्षिका फूलमती कुमारी के भरोसे स्कूल में थीं. रात को नौ बजे जब सुशांति की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो फूलमती से मिली सूचना को भी वार्डन ने गंभीरता से नहीं लिया. सुबह भी बहुत देर से छात्रा को अस्पताल लाया गया.
दो साल से नहीं लगा है चिकित्सा कैंप
उपायुक्त के निर्देश के बावजूद मनोहरपुर के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मे विगत दो वर्षों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सा कैंप नही लगाया गया है. इसकी पुष्टि करते हुए वार्डन ने कहा कि आमतौर पर बीमार छात्राओं को अस्पताल लाया जाता है और कई मामलों में छात्राओं को परिजन के साथ भेज दिया जाता है. मौके पर मौजूद एसडीओ ने डाॅ कमलेश प्रसाद को नियमित रूप से कैंप लगाने का निर्देश दिया.
सोमवार से खराब थी सुशांति की तबीयत, नहीं खाया था खाना
सुशांति की मौत पर मंगलवार को कस्तूरबा विद्यालय में शोक सभा का आयोजन किया गया. इसके बाद छुट्टी दे दी गयी. सभा में उपस्थित शिक्षिकाअों व छात्राओं ने दो मिनट का मौन रखा कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. मौके पर शिक्षिका किरण टोपनो, सहबति चिक बड़ाइक, रामनंदन महतो समेत विद्यालय की सभी छात्राएं मौजूद थी.
टीम गठित कर हुई जांच : सुशांति की मौत को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारियों का एक दल मंगलवार दोपहर जांच करने विद्यालय पहुंचा. इस दौरान एसडीओ प्रदीप प्रसाद, बीडीओ जितेंद्र पांडे, सीओ केके मुंडू व आनंदपुर बीडीओ मनोज तिवारी ने प्रखंड प्रमुख गुरुवारी देवगम, पंसस सरिता कुजूर, मंजू देवी के साथ मौते के कारणों की जांच की. साथ ही छात्राओं से अलग-अलग पूछताछ की. पदाधिकारियों ने स्कूल के किचन, खान-पान, रहन सहन, हॉस्टल व शिक्षिकाओ के बर्ताव व छात्राओ की समस्या की जानकारी ली. इस दौरान वार्डन रेखा रानी महतो पूछताछ में अधिकारी नाराज दिखे.
सुशांति को पानी पीने में हो रही थी दिक्कत : छात्राओं ने टीम को बताया कि उनके पास मच्छरदानी नहीं है. छात्राओं ने यह भी बताया कि सुशांति की तबीयत सोमवार से खराब थी. उसने दिन में खाना नहीं खाया था तथा उसे पानी पीने में भी दिक्कत हो रही थी. मौके पर एसडीओ ने बीडीओ को निर्देश देते हुए समय-समय पर स्कूल का दौरा करने की बात कही. दूसरी ओर डीएसपी अशोक रविदास ने मामले की जानकारी स्कूल जाकर छात्राओं से लीं
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