1.83 लाख का घोटाला, तीन अभियंता व संवेदक पर केस

Updated at : 13 Nov 2017 8:28 AM (IST)
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1.83 लाख का घोटाला, तीन अभियंता व संवेदक पर केस

झारखंड पुलिसिंग कॉरपोरेशन के अभियंता ने पकड़ी गड़बड़ी टाटा का है संवेदक, पुलिसिंग कॉरपोरेशन के हैं तीनों अभियंता चाईबासा : गुवा थाना निर्माण कार्य में 1,83,651 रुपये का घोटाला हुआ है. संवेदक और तीन अभियंताओं ने मिलीभगत कर राशि का गबन कर लिया है. जितना कार्य हुआ था, उससे अधिक राशि का भुगतान कर वित्तीय […]

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झारखंड पुलिसिंग कॉरपोरेशन के अभियंता ने पकड़ी गड़बड़ी
टाटा का है संवेदक, पुलिसिंग कॉरपोरेशन के हैं तीनों अभियंता
चाईबासा : गुवा थाना निर्माण कार्य में 1,83,651 रुपये का घोटाला हुआ है. संवेदक और तीन अभियंताओं ने मिलीभगत कर राशि का गबन कर लिया है. जितना कार्य हुआ था, उससे अधिक राशि का भुगतान कर वित्तीय अनियमितता की गयी है. गुवा थाना निर्माण कार्य की भौतिक सत्यापन जांच से मामले का खुलासा हुआ है. मामले का पर्दाफाश होने पर झारखंड पुलिसिंग हाउसिंग कॉरपोरेशन जमशेदपुर के कार्यपालक अभियंता ने गुवा थाना प्रभारी को पत्र भेजकर मामले की जांच करने तथा गबन के आरोपियों पर भ्रष्टाचार करने के आरोप में कार्रवाई करने अनुशंसा की है. हाउसिंग कॉरपोरेशन की अनुशंसा पर गुवा थाना पुलिस ने संवेदक मोहम्मद अखलाक अहमद, हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड सहायक अभियंता, अशोक कुमार इंदुवार, कनीय अभियंता लुकमान अंसारी, कार्यपालक रविशंकर प्रसाद पर प्राथमिकी दर्ज किया है.
गुवा थाना का निर्माण कार्य 3 जुलाई 2008 को शुरू हुआ था. 2 मार्च 2009 तक निर्माण कार्य पूर्ण कर लेना था. इसी बीच टाटा के जुगलसाई स्थित गौरीशंकर रोड निवासी संवेदक मोहम्मद अखलाक अहमद प्रथम तल्ले पर कहीं-कहीं लिंटर लेबल तक कार्य छोड़ कर फरार हो गया. निर्माण कार्य बंद किये जाने के कारण संवेदक की जमानत राशि जब्त कर ली गयी. संवेदक द्वारा किये गये कार्य की फिर से मापी करायी गयी. मापी के क्रम में पाया गया कि जितना निर्माण हुआ है, उससे अधिक उसे भुगतान कर दिया गया है.
27 लाख का हुआ कार्य, 29 लाख रुपये कर दिया भुगतान
निर्माण कार्य की फिर से मापी करायी गयी. मापी के दौरान संवेदक को भी उपस्थित रहने का पत्र भेजा गया था. लेकिन, संवेदक उपस्थित नहीं हुआ. 21 नवंबर 2015 को फिर से मापी करायी गयी.
मापी में पाया गया कि संवेदक ने कुल 27 लाख 31 हजार 930 रुपये का कार्य किया है. लेकिन, तीनों अभियंताओं ने एमबी बुक में हेराफेरी कर 29 लाख 15 हजार 581 रुपये का भुगतान कर दिया है. तीनों अभियंताओं पर ही मापी पुस्तिका निरीक्षण करने की जिम्मेवारी थी.
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