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-पत्रकारिता का काम महज सूचना देना नहीं, बल्कि जनचेतना लाना है:उपायुक्त

Updated at : 16 Nov 2025 9:02 PM (IST)
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-पत्रकारिता का काम महज सूचना देना नहीं, बल्कि जनचेतना लाना है:उपायुक्त

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर रविवार को जिला जन संपर्क विभाग द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया

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राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण पर हुई संगोष्ठी

फोटो फाइल: 16 एसआइएम:5-कार्यक्रम का उदघाटन करते उपायुक्त

सिमडेगा. राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर रविवार को जिला जन संपर्क विभाग द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस मौके पर बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गयी. इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर उपायुक्त कंचन सिंह एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में एसपी एम अर्शी, डीडीसी दीपांकर चौधरी, एसडीओ प्रकाश रंजन ज्ञानी और खेल पदाधिकारी मनोज कुमार मौजूद थे. संगोष्ठी के माध्यम से बताया गया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. यहां लोकतंत्र के चार स्तंभों में से तीन पर निगरानी रखने और उनके संबंध में समाज की अंतिम पंक्ति तक फीडबैक देने का काम चौथा स्तंभ मीडिया ही करता है. वर्तमान परिवेश में बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गयी. संगोष्ठी में भारतीय मीडिया के विस्तार एवं प्रभाव पर प्रकाश डाला गया. उपायुक्त ने कहा कि पत्रकारिता का काम महज सूचना देना नहीं बल्कि जनचेतना लाना है. यह जिम्मेदारी मीडिया को समझनी होगी. मीडिया किसी भी राष्ट्र का आंख, कान व मुंह होते हैं. इसके माध्यम से देश देखता, सुनता व समझता है. टीवी, रेडियो, समाचार पत्र, सोशल मीडिया आदि आम लोगों के विचार एवं निर्णय क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं. मीडिया की यह भूमिका यदि सकारात्मक हो तो वह राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकता है. मीडिया अथवा जनसंचार माध्यम किसी भी समाज या देश की वास्तविक स्थिति के प्रतिबिंब होते हैं. देश के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक फलक पर क्या कुछ घटित हो रहा है, इससे आमजन मीडिया के द्वारा ही परिचित होते हैं. जनसंचार माध्यमों के विभिन्न रूपों ने आज दुनिया के लगभग हर कोने तक अपनी पहुंच बना रखी है. मीडिया की शक्ति का आकलन उसकी व्यापक पहुंच के मद्देनजर किया जा सकता है.संगोष्ठी शुरू करने से पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत उपायुक्त व अन्य पदाधिकारियों और मीडिया कर्मियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गयी. इसके बाद मीडिया कर्मियों ने प्रशासन को और प्रशासन ने मीडिया कर्मियों को सम्मानित किया. इस मौके पर जिला जन-सर्म्पक कार्यालय के द्वारा सभी आगंतुकों का स्वागत किया गया. संगोष्ठी में मीडिया कर्मियों की तरफ से बोलते हुए सिमडेगा के वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिन्हा ने कहा कि बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है. पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को सूचनाओं को प्रकाशित करने से पहले उनका सत्यापन करना चाहिए. नरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि मीडिया संस्थानों को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति देनी चाहिए. सरकार और अन्य प्रभावशाली समूहों के दबाव से मुक्त होकर पत्रकारों को अपनी वास्तविक व जिम्मेदार रिपोर्टिंग करनी चाहिए. सुहैब शाहिद ने कहा कि मीडिया संस्थानों को भ्रामक सूचनाओं का खंडन करना चाहिए. वह अपने प्लेटफॉर्म पर भ्रामक सूचनाओं को हटाने और उनका खंडन करने के लिए कदम उठा सकते हैं.दीपक रिंकू ने कहा कि सरकार प्रशासन और मीडिया संस्थानों को मिलकर मीडिया के लिए नियमन बनाना चाहिए. यह नियमन पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करने और भ्रामक सूचनाओं को रोकने में मदद कर सकते हैं. आशीष शास्त्री ने कहा कि जिला प्रशासन विकास के कार्यों को समय पर मीडिया से साझा करेगी तभी विकास का सही जानकारी जनता को मिल सकेगी.धन्यावाद ज्ञापन जिला जन-संपर्क पदाधिकारी पलटू महतो ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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