सनातन धर्म शाश्वत व अनंत है इसे बदला नहीं जा सकता: शंकराचार्य

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दुर्गा मंदिर परिसर में द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के आगमन पर सनातन समाज की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया

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प्रतिनिधि जलडेगा. दुर्गा मंदिर परिसर में द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के आगमन पर सनातन समाज की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया. मंदिर परिसर “जय श्री राम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा. चरण पादुका पूजन के उपरांत जगद्गुरु शंकराचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म का पालन ही मानव जीवन का मूल आधार है. धर्म ही व्यक्ति का उद्धार करता है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शाश्वत और अनंत है, इसे बदला नहीं जा सकता. जिस प्रकार हम अपने पूर्वजों और माता-पिता को नहीं बदल सकते उसी प्रकार धर्म परिवर्तन भी उचित नहीं है. उन्होंने सनातन धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीराम और भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का मार्मिक वर्णन किया. अपने संबोधन में उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों से अपनी आस्था और परंपराओं के प्रति सजग रहने का आह्वान किया. कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने आशीर्वाद प्राप्त किया. मंच संचालन सुभाष साहु ने किया. मौके पर शिव प्रताप सिंह देव, इंद्रजीत मलिक, मंजु पटेल, उमेश रवानी, बुद्धदेव कुमार साहू, सुदीप नाग, रामचंद्र साहू, अमित गोयल, राजेश अग्रवाल, रामेश्वर सिंह, संतोष सिंह, मोतीलाल ओहदार, त्रिलोक साहू, मिठु राम वर्मा, जसवंत साहू, अरुण मिश्रा, चंदन मिश्रा, रामावतार अग्रवाल, महेश साहू, भोला साहू, विनोद साहू, मदन सरकार सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे. मौके पर शिशु विद्या मंदिर के बच्चों एवं परबा कीर्तन मंडलियों द्वारा भजन-कीर्तन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गयी. जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा.

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