सिमडेगा. मदरसा इस्लामिया तजविदुल कुरआन में गुरुवार की रात तालीमी मुजाहिरा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन से हुई. मौके पर मदरसा में पढ़ने वाले बच्चों के बीच तिलावत, नात व तकरीर की प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं. इसमें बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. कार्यक्रम मौलाना अय्याज काशमी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. मुख्य अतिथि के रूप में कटक ओड़िशा से आये मौलाना शरीफ काशमी मौजूद थे. संचालन मोहम्मद रेहान ने किया. अपनी तकरीर में मौलाना शरीफ काशमी ने कहा कि तालीम किसी भी कौम की तरक्की की बुनियाद है. उन्होंने कहा कि इस्लाम ने इल्म को फर्ज करार दिया है और कुरआन की पहली आयत इकरा इस बात की गवाही देती है कि तालीम को इस्लाम में कितनी अहमियत दी गयी है. उन्होंने अफसोस जताया कि तालीम से दूरी के कारण ही आज मुसलमान सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ते जा रहे हैं. मौलाना शरीफ ने कहा कि दीन व दुनिया की तालीम में संतुलन बेहद जरूरी है. मदरसे न सिर्फ दीनी तालीम देते हैं, बल्कि बच्चों के अंदर अखलाक, किरदार व इंसानियत भी पैदा करते हैं. तकरीर प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मो मुदस्सिर ने अपनी तकरीर में समाज में फैली गंभीर सामाजिक और दीनी कुरीति पर रोशनी डाली. उन्होंने कहा कि इस्लाम ने बेटियों को बाप की संपत्ति में उनका मुकम्मल हक दिया है. कुरआन के अनुसार बेटियों को विरासत में हिस्सा देना अल्लाह का हुक्म है, जिसे न देना या हड़प लेना गुनाह है. मुदस्सिर ने कहा कि आज समाज में अक्सर देखा जाता है कि बाप की मौत के बाद भाई या परिवार के पुरुष सदस्य बहनों को उनका हक नहीं देते, जो न सिर्फ शरीयत के खिलाफ है, बल्कि अल्लाह के हुक्म की नाफरमानी भी है. प्रतियोगिता में सफल बच्चे : तिलावत प्रतियोगिता में मोहम्मद मुस्तफा ने प्रथम, मुहम्मद शोएब ने द्वितीय और फैजान ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. नात प्रतियोगिता में मोहम्मद वसीम प्रथम, मोहम्मद अल्ताफ द्वितीय और समीउल्लाह तृतीय स्थान पर रहे. तकरीर प्रतियोगिता में अफीफ हाशमी प्रथम, मोहम्मद मसूद द्वितीय और मुहम्मद मुदस्सर तृतीय स्थान पर रहे. कार्यक्रम का समापन मौलाना शरीफ काशमी की दुआ के साथ हुआ. सफल प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. मौके पर मुफ्ती इस्राफिल, मौलाना शाकिब, मुफ्ती मतिउल्लाह, मौलाना मुख्तार, हाफिज अमानत, मौलाना मिन्हाज रहमानी, मौलाना आसिफुल्लाह, सेंट्रल अंजुमन के सदर मो ग्यास, अलाउद्दीन मौजूद थे.
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