Seraikela Kharsawan News : बेटियों व महिलाओं के सशक्तीकरण से ही समाज में परिवर्तन संभव : सोनाराम बोदरा

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Seraikela Kharsawan News : बेटियों व महिलाओं के सशक्तीकरण से ही समाज में परिवर्तन संभव : सोनाराम बोदरा

कार्यशाला के माध्यन से बालिकाओं, परिवार और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक सामाजिक, शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी दी गयी

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सरायकेला. सामाजिक कुरीति निवारण योजना के अंतर्गत संचालित “हमारा संकल्प-सुरक्षित एवं सशक्त महिला, सशक्त झारखंड” कार्यक्रम के तहत मंगलवार को सरायकेला टाउन हॉल में बाल विवाह मुक्त झारखंड एवं डायन प्रथा उन्मूलन विषय पर प्रशिक्षण सह कार्यशाला संपन्न हुई. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. इस दौरान बाल-विवाह विषय पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की गयी, जिसके माध्यम से बाल विवाह से बालिकाओं, परिवार और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक सामाजिक, शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी दी गयी. उपस्थित लोगों से अपील की गयी कि वे अपने आसपास होने वाले बाल विवाह की घटनाओं की सूचना प्रशासन को दें.

बालक-बालिकाओं को समान शिक्षा दें:

मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि बाल विवाह मुक्त झारखंड के लिए बनाये गये कानूनी प्रावधानों का पालन और समाज में जागरुकता दोनों ही आवश्यक हैं. उन्होंने बालक-बालिकाओं को समान शिक्षा का अवसर देने, बेटियों और महिलाओं को सशक्त बनाने तथा “न दहेज लेंगे, न दहेज देंगे” का संकल्प लेने का आह्वान किया. कार्यशाला में जिला परिवहन पदाधिकारी गिरजा शंकर महतो, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर, सामाजिक सुरक्षा निदेशक निवेदिता कुमारी, सीडीपीओ सुचि कुमारी, दुर्गेश नंदनी, महिला पर्यवेक्षक और सेविकाएं उपस्थित थीं.

सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए शिक्षा और जागरुकता जरूरी : रीना हांसदा

उप विकास आयुक्त रीना हांसदा ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों की जड़ अशिक्षा और जागरुकता की कमी है. उन्होंने राज्य सरकार द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तीकरण के लिए चलायी जा रही योजनाओं की जानकारी दी और पात्र लाभार्थियों से इनका लाभ उठाने की अपील की.

बाल विवाह मुक्त झारखंड के लिए 
सामूहिक प्रयास जरूरी : मधुश्री महतो

जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है. हर व्यक्ति को सजग रहना चाहिए. पद्मश्री छुटनी महतो ने अपने संघर्ष को साझा किया. बताया कि कैसे उन्होंने इस अमानवीय कुप्रथा से महिलाओं को बचाने का कार्य किया.

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