Seraikela Kharsawan News : खूंटपानी के 55 बच्चे मिशन वात्सल्य की फोस्टर केयर योजना से जुड़े

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 28 Jan 2026 11:51 PM

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इंटरफेस सह उन्मुखीकरण बैठक में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा

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खरसावां. पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड के 55 संवेदनशील ग्रामीण बच्चों को मिशन वात्सल्य (स्पॉन्सरशिप एंड फोस्टर केयर) योजना से जोड़ा गया है. इस संबंध में 27 जनवरी को खूंटपानी प्रखंड कार्यालय में इंटरफेस सह उन्मुखीकरण बैठक का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े सभी हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करना तथा देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (सीएनपीसी) को सरकारी योजनाओं से प्रभावी रूप से जोड़ना था. कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधि, जिला स्तरीय अधिकारी, विधिक सेवा संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठनों ने भाग लिया.

55 संवेदनशील बच्चों को मिला योजना का लाभ

बैठक के दौरान जानकारी दी गयी कि जिले में 55 सीएनपीसी बच्चों को सफलतापूर्वक मिशन वात्सल्य की प्रायोजन योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है. इस योजना के माध्यम से इन बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं समग्र विकास के लिए नियमित आर्थिक और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जायेगा. अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को परिवार आधारित देखभाल प्रदान करना तथा उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना है.

नियमित इंटरफेस बैठकें होंगी

निर्णय लिया गया कि भविष्य में इस तरह की इंटरफेस सह उन्मुखीकरण बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जायेंगी, ताकि जमीनी स्तर पर बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा सके. वक्ताओं ने बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बहु-स्तरीय समन्वय को मिशन वात्सल्य की सफलता की कुंजी बताया. गौरतलब है कि हाल ही में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिले में बिना अभिभावक के रहने वाले 100 ग्रामीण बच्चों को फोस्टर केयर योजना से जोड़ने का निर्देश दिया गया था. कार्यक्रम में खूंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा, जिला परिषद सदस्य यमुना तियू, वीरेंद्र हेम्ब्रम,डीसीपीओ पुनीता तिवारी, एमडी समीम आदि मौजूद थे.

बाल संरक्षण कानूनों व फोस्टर केयर सेवाओं पर चर्चा

वक्ताओं ने बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों, किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट), प्रायोजन एवं फोस्टर केयर सेवाओं, साथ ही पंचायत स्तर पर संवेदनशील बच्चों की पहचान विस्तार से जानकारी दी. पंचायत प्रतिनिधियों को बताया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे बच्चों की पहचान कर जिला बाल संरक्षण इकाई को सूचित कर योजनाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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