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Seraikela Kharsawan News : ''''नयी तकनीक से बढ़ेगा तसर का उत्पादन''''

Updated at : 02 Sep 2025 11:20 PM (IST)
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Seraikela Kharsawan News : ''''नयी तकनीक से बढ़ेगा तसर का उत्पादन''''

कुचाई. ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ के तहत रोग प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित

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खरसावां. कुचाई के गोपीडीह में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ के तहत रोग प्रबंधन विषय पर मंगलवार को कार्यशाला सह जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कुचाई के लेप्सो गांव में तसर के मेंटेनेंस का डेमोस्ट्रेशन दिया गया. कार्यक्रम में पहुंचे सहायक उद्योग निदेशक रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि रेशम की खेती के दौरान रोग प्रबंधन पर भी ध्यान देने की जरूरत है. फसल को रोग से बचा कर ही अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि देशभर में रेशम प्रोडक्शन को नयी ऊंचाई देने के लिए ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ अभियान की शुरुआत की गयी है. इससे एडवांस टेक्नोलॉजी खेतों तक पहुंचेगी व रेशम क्षेत्र का विस्तार होगा.

नयी तकनीक से आत्मनिर्भर बनें किसान :

पीपीओ खरसावां ने किसानों को तसर रेशम कीटपालन व विकसित हो रहे नयी तकनीक की जानकारी दी. साथ ही तसर किसानों की समस्याओं का समाधान करने की दिशा में पहल करने की बात कही. हाट गम्हरिया पीपीओ ने कहा कि तसर की खेती को अपना कर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं.

देश के 100 जिलों में चलेगा ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम :

सेंट्रल सिल्क बोर्ड की ओर से देश के 100 जिलों में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके तहत झारखंड के छह जिले सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, गोड्डा, गिरिडीह, दुमका व देवघर शामिल हैं. कार्यक्रम में कच्चा माल बैंक चाईबासा के सहायक सचिव राम मोहन प्रमाणिक, खरसावां पीपीओ नीतीश कुमार, प्रोजेक्ट सहायक डोमन कुंभकार, लक्ष्मण गोप, मंगल सोय, मनोज बनर्जी, जितेन कुमार, राजकिशोर महतो, राजकुमार आदि उपस्थित थे.

खरसावां-कुचाई की विशेष पहचान है रेशम

केंद्रीय तसर अनुसंधान व प्रशिक्षण संस्थान, रांची की वैज्ञानिक डॉ अपर्णा कोप्पारपु ने किसानों को तसर रेशम कीट पालन व विकसित नयी तकनीक की जानकारी दी. किसानों को नयी तकनीक अपनाने की सलाह दी, ताकि अधिक उत्पादन हो. तसर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पहल करने की बात कही. डॉ अपर्णा ने कहा कि रेशम की खेती के कारण राष्ट्रीय क्षितिज पर खरसावां-कुचाई की विशेष पहचान है. उन्होंने किसानों को तसर की खेती में नयी तकनीक को अपनाने की सलाह दी, ताकि अधिक उत्पादन हो सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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