Seraikela Kharsawan News : भाईचारा, प्रेम और प्रकृति के आभार का पर्व है सोहराय

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 29 Oct 2025 11:32 PM

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मांदर की थाप पर जमकर थिरके महिलाएं और पुरुष

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चांडिल. ईचागढ़ प्रखंड की बांदु पंचायत में संताल बहुल कुरुकतोपा गांव में बुधवार को पारंपरिक सोहराय पर्व हर्षोल्लास और सांस्कृतिक उमंग के साथ मनाया गया. गांव में सुबह से उत्सव का माहौल रहा. लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे थे. गांव की गलियां फूलों और रंगोली से सुसज्जित की गयीं थीं. गांव के नायके बाबा डापटा मुर्मू ने विधिवत पूजा अर्चना कर शुरुआत की. उन्होंने पशुधन, फसलों और प्रकृति की समृद्धि की कामना करते हुए सामूहिक प्रार्थना की. पूजा के पश्चात ढोल और मांदर की थाप गूंज उठी. महिलाएं व पुरुष पारंपरिक संताली गीतों की धुन पर थिरकने लगे. ग्रामीणों के चेहरों पर उल्लास और आपसी एकता की झलक स्पष्ट नजर आ रही थी. सभी ने मिलकर सामूहिक नृत्य किया. ग्रामीणों ने बताया कि सोहराय संताल समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो फसल कटाई और पशुधन के सम्मान से जुड़ा हुआ है. यह पर्व समुदाय में आपसी भाईचारा, प्रेम और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक माना जाता है. शाम होते-होते गांव में पारंपरिक भोजन का आयोजन किया गया. जिसमें लेटो पिठा, चूड़ा-दही और स्थानीय व्यंजनों का लोगों ने आनंद लिया. इस अवसर पर संजय मार्डी, सुदामा हेम्ब्रम, फुचुन हेम्ब्रम, कलेबर हेम्ब्रम, सुपेश हेम्ब्रम, जयचांद मुर्मू आदि उपस्थित थे.

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