Seraikela Kharsawan News : धान के बाद अब जिले में रबी फसल का दायरा बढ़ा
Updated at : 08 Jan 2026 11:30 PM (IST)
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सरायकेला-खरसावां : दलहन-तेलहन की खेती के क्षेत्र में हुई वृद्धि, सरसों व चना को पसंद कर रहे किसान
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खरसावां.
सरायकेला-खरसावां जिले में इस वर्ष किसानों का झुकाव बड़े पैमाने पर रबी की खेती की ओर हुआ है. जिले में 73,430 हेक्टेयर भूमि में रबी फसल लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से अब तक 41,814 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो चुकी है. यह लक्ष्य का लगभग 56.94 प्रतिशत है. विभागीय स्तर पर इसे शत-प्रतिशत पूरा करने का प्रयास जारी है. मौसम अनुकूल रहने के कारण पिछली बार की तुलना में इस वर्ष रबी फसल का क्षेत्र बढ़ा है.17,610 हेक्येटर में दलहन, तो 20,646 हेक्टेयर में तेलहन की खेती
जिले में 28,115 हेक्टेयर दलहन फसल के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 17,610 हेक्टेयर क्षेत्र (62.64%) में दलहन की खेती हुई है. वहीं 38,700 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 20,646 हेक्टेयर (53.35%) में तेलहन की खेती हो चुकी है. किसानों का जोर चना और सरसों की खेती पर अधिक है. जिले में 11,240 हेक्टेयर क्षेत्र में चना तथा 20,140 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती की जा रही है.सूर्यमुखी व कुसुम की खेती की योजना अधर में
सरकार की ओर से किसानों को बड़ी संख्या में निशुल्क बीज उपलब्ध कराये गये हैं. विभिन्न योजनाओं के तहत गेहूं, चना, सरसों और मक्का आदि के बीज वितरित किये गये, जबकि कई किसानों ने निजी स्तर पर भी दलहन और तेलहन की खेती की है. हालांकि, जिले में सूर्यमुखी और कुसुम की खेती कराने की योजना अब तक अधर में है.
पहले जहां होती थी अफीम की खेती इस बार रबी की फसल लहलहायी
पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में एक सामाजिक और कृषि परिवर्तन भी देखने को मिल रहा है. कुचाई से लेकर खरसावां, कांड्रा व चौका-चांडिल तक के पहाड़ी इलाकों में अब अफीम की खेती की जगह रबी फसलें लहलहा रही हैं. पुलिस के जागरुकता अभियान के कारण ग्रामीण अब सरसों, चना और धान की खेती कर रहे हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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