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Seraikela Kharsawan News : पदमपुर में मां काली पूजा व मेला की तैयारी चरम पर

Updated at : 18 Oct 2025 12:01 AM (IST)
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Seraikela Kharsawan News : पदमपुर में मां काली पूजा व मेला की तैयारी चरम पर

खरसावां : कलिंग शैली में निर्मित मंदिर बना आकर्षण का केंद्र, 21 से लगेगा मेला, पदमपुर में 1897 से हो रही मां काली की पूजा

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खरसावां. खरसावां के ऐतिहासिक पदमपुर (तेलासाही) में इस वर्ष मां काली पूजा और मेला की तैयारियां जोरों पर हैं. मां काली की पूजा 20 अक्तूबर की रात नौ बजे से आरंभ होगी. इस अवसर पर मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित कर तांत्रिक विधि से पूजा-अर्चना की जायेगी. मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और विद्युत सज्जा द्वारा भव्य रूप दिया जा रहा है. पूजा का समापन 26 अक्तूबर शाम चार बजे मां काली की प्रतिमा विसर्जन के साथ किया जायेगा. पदमपुर में मां काली की पूजा 1897 से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है. कहा जाता है कि खरसावां रियासत के तत्कालीन राजा ठाकुर महेंद्र नारायण सिंहदेव के शासनकाल में पदमपुर के जमींदार वैद्यनाथ सिंहदेव ने मां काली के आविर्भाव के बाद यह मंदिर स्थापित कराया था. तब से हर वर्ष काली पूजा तांत्रिक विधि से की जाती है. कोल्हान क्षेत्र सहित ओडिशा और बंगाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

आकर्षण का केंद्र मां काली मंदिर

पदमपुर का काली मंदिर क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण है. कलिंग वास्तुशिल्प शैली में निर्मित इस मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां और चित्र लोककला की झलक देते हैं. मंदिर के मुख्य द्वार पर कोणार्क मंदिर की तर्ज पर निर्मित सूर्य चक्र विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. बाहरी दीवारों पर की गयी नक्काशी और रंगीन चित्रकारी मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा रही है.

बड़ाबांबो में मां श्यामा काली पूजा

खरसावां के बड़ाबांबो रेलवे स्टेशन के समीप मां श्यामा काली पूजा की तैयारियां भी पूरी रफ्तार पर हैं. यहां 1975 से पूजा का आयोजन हो रहा है. उस वर्ष स्टेशन पर कार्यरत रेल कर्मचारियों ने पहली बार प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की थी.

21 अक्तूबर से पदमपुर-तेलासाही मेला

मां काली पूजा के साथ 21 अक्तूबर से यहां सात दिवसीय मेला भी आरंभ होगा, जो 128 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है. इस मेला में हजारों लोग शामिल होते हैं. मनोरंजन के लिए नाव झूला, ड्रैगन झूला, ब्रेज डांस झूला, थ्री-डी झूला सहित कई आकर्षक व्यवस्थाएं की जा रही हैं. साथ ही ओडिशा की नाट्य संस्थाएं ओडिया नाटक भी प्रस्तुत करेंगी. क्षेत्रीय हस्तकला और खाद्य सामग्री की दर्जनों दुकानें भी लगायी जायेंगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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By ATUL PATHAK

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