Seraikela Kharsawan News : झारखंड में ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं बैल व भैंस

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 23 Oct 2025 11:09 PM

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पारकीडीह में गोरू खुंटाव, ढोल नगाड़ों पर थिरके ग्रामीण

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चांडिल. चांडिल और आसपास के गांवों में गोरू खुंटाव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इस दिन ग्रामीण अपने बैलों को सजाते हैं. चावल के आटे से बने घोल पर रंग-बिरंगे रंग लगाते हैं और गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के संग उन्हें नचाते हैं. गागूडीह मैदान में भी बांदना खूंटान का आयोजन किया गया, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पशुओं की पूजा हुई. इसी तरह नीमडीह प्रखंड के पारकीडीह में भी ढोल-नगाड़ों के साथ गोरू और भैंसा खुंटाव हुआ, जिसमें झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सचिन गोप शामिल हुए. सचिन गोप ने कहा कि झारखंड के लोग प्रकृति और पशुधन दोनों की पूजा करते हैं. मिट्टी हमें अन्न देती है, और अन्न उपजाने में पशुधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. वह खेत जोतने से लेकर खाद तक हर काम में सहायक हैं. इसलिए गाय, बैल, और भैंस ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने यह भी बताया कि हमारे पूर्वज दीपावली के बाद से ही पशुधन पूजा (बांदना या सोहराय) का आयोजन करते आ रहे हैं. मौके पर अजित माडी, नरेश हेब्रम, परेश हेब्रम, मंगल मांझी, अनिल मांझी, देवेन् टुडू, जग्गानाथ हांसदा, मुटुक मांझी, लम्बू टुडू समेत ग्रामीण उपस्थित थे.

फसल, पशुधन व प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है सोहराय

बड़ाबांबो. कुचाई व खरसावां क्षेत्र में पारंपरिक उल्लास और उमंग के साथ सोहराय पर्व मनाया गया.आदिवासी बहुल गांवों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा. प्रखंड के तोड़ागडीह, डोरो,पोंडाकाटा,जामदा, अरूवां,सेरेंगदा, खरसावां, बड़ाबाम्बो, जोजोकुड़मा, लोसोदिकी, पिताकलांग, उदालखाम समेत आसपास के गांवों में लोगों ने अपने पशुधन गाय और बैलों की विधिवत पूजा-अर्चना की. पूजा के बाद ग्रामीणों ने अखाड़े में पारंपरिक परिधान पहनकर ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया. वहीं, पारंपरिक गीतों की गूंज के बीच सजे-धजे बैलों को नचाया गया. ग्रामीणों ने आपसी एकता और खुशहाली की कामना करते हुए पारंपरिक व्यंजन बनाकर एक-दूसरे को खिलाया. गांवों में पूरे दिन उत्सव का माहौल बना रहा. शाम तक ढोल-नगाड़ों की गूंज और नृत्य गीतों से पूरा क्षेत्र झूमता रहा. तोडांगडीह निवासी तिलक प्रसाद महतो ने बताया कि सोहराय पर्व अच्छे फसल और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है. यह पर्व समाज में भाईचारे, श्रम और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को सशक्त करता है. कृषि कार्य में सहयोग करने के लिए पशुधन का सम्मान किया जाता है.

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