Seraikela Kharsawan News : टुसू मेले में दिखा लोकसंस्कृति का रंग

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 24 Jan 2026 12:13 AM

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टुसू मेला में कलाकारों के रंगारंग सास्कृतिक प्रस्तुति पर झूमे लोग

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चांडिल. न्यू बायपास सड़क के समीप चांडिल स्टेशन पर सार्वजनिक टुसू मेले के अंतिम दिन शुक्रवार को भी हजारों लोग उमड़े. पश्चिम बंगाल के सुप्रसिद्ध शीला शिल्पी व उनकी टीम के रंगारंग झूमर नृत्य व गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. चांडिल अनुमंडल के अलावा पश्चिम बंगाल, रांची, जमशेदपुर से भारी संख्या में श्रोता आए थे. टुसू प्रतिमा व चौड़ल टुसू में प्रथम 15,000, द्वितीय 10,000 व तृतीय पुरस्कार 5,000 रुपये दिये गये. मौके पर ईचागढ़ विधायक सविता महतो, आजसू नेता हरेलाल महतो, समाजसेवी राकेश वर्मा, मेला संस्थापक विश्वरंजन महतो, झामुमो नेता ओम प्रकाश लायक, पूर्व जिप सदस्य अनिता पारित, प्रखंड प्रमुख रामकृष्ण महतो, मेला अध्यक्ष भोला सिंह सरदार आदि उपस्थित थे.

संतोष ने झूमर की प्रस्तुति से समां बांधा, झूमे श्रद्धालु

खरसावां. कुचाई के पारोलबादी गांव में शुक्रवार को झारखंड की लोक संस्कृति को समर्पित झूमर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. फोक डांस और गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा गांव झूम उठा. झूमर सम्राट संतोष महतो ने अपनी टीम के साथ कुरमाली, खोरठा, नागपुरी और संबलपुरी गीतों पर प्रस्तुति दी. ट्रेडिशनल म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स के धुन पर संतोष महतो ने झूमर की स्वरलहरियों से समां बांधां.

आखड़ा बंदना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत :

कार्यक्रम की शुरुआत आखड़ा बंधना से हुई, उसके बाद दर्शकों की मांग पर झूमर की स्वरलहरियां छाईं. झूमर सम्राट संतोष महतो ने अपनी टीम संग ””फागुन चैत मासे””, ””महुल पड़े रसे रसे…””, ””ए मोर सांगातीन””, ””चोल ना मोर सोंगे कोनो दिन…””, ””झारखंडेर माटी दादा सरगे समान…””, ””हामोर किना दोषा हेली गो””, ””लोकेक भीड़े बहु टी कोंदे गेली गो”” आदि लोकप्रिय गीतों से माहौल बांधां. ट्रेडिशनल वाद्ययंत्रों जैसे मांदर, ढोल, नगाड़ा और बांसुरी की धुनों पर उनकी प्रस्तुति ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. मिस दीपिका, मिस लीली, शिव महतो और संध्या रानी ने संतोष महतो संग युगलबंदी में कई झूमर पेश किये. यह कार्यक्रम आधुनिक दौर में भी झारखंड की फोक संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित रखने का संदेश दिया. झूमर मुख्य रूप से झारखंड, बंगाल और ओडिशा में लोकप्रिय है. इसके बोल राढ़ी बंगला, कुदमाली, देहाती ओडिया, तामड़िया व नागपुरी में होते हैं.

खरसावां-कुचाई में सरस्वती पूजा की धूम, पूजा-अर्चना में जुटे विद्यार्थी

खरसावां. खरसावां, कुचाई, बड़ाबांबो, राजखरसावां और आसपास के क्षेत्रों में मां सरस्वती पूजा का उत्साह देखा गया. बसंत पंचमी पर खरसावां-कुचाई के करीब 500 से अधिक स्थानों पर विद्या की देवी की पूजा हो रही है. खरसावां के संतारी गांव में आकर्षक पूजा पंडाल बनाया गया है. इस प्रतिमा के माध्यम से बालिका शिक्षा का महत्वपूर्ण संदेश दिया. पंडालों में विद्युत सज्जा की विशेष व्यवस्था की गयी है. सरस्वती पूजा पंडालों में बच्चे पहुंच कर मां सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित कर रहे है.

मां सरस्वती की आराधन कर छोटे-छोटे बच्चों ने शुरु किया विद्यारंभ :

श्री पंचमी पर नन्हें-मुन्ने बच्चों ने मां सरस्वती की पूजा कर विद्यारंभ किया. इसे स्थानीय भाषा में ””””खड़ी छुंआ”””” कहते है. इसमें दो-तीन साल के बच्चों द्वारा मां सरस्वती की पूजा कराने के बाद पढ़ाई की शुरुआत हुई. बसंत पंचमी का दिन विद्यारंभ या अक्षर अभ्यास के लिए काफी शुभ माना जाता है, इसलिए माता-पिता इस दिन शिशु को माता सरस्वती के आशीर्वाद के साथ विद्यारंभ कराते हैं.

अशोका इंटरनेशनल स्कूल में पूजी गयीं मां :

खरसावां स्थित अशोका इंटरनेशनल स्कूल में बसंत पंचमी पर छात्र-छात्राओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की. विद्यालय परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था, बच्चों ने कलम, किताब और वाद्य यंत्र मां के चरणों में रखकर विद्या व सफलता का आशीर्वाद मांगा. मौके पर विद्यालय के निदेशक सत्यनारायण प्रधान, प्राचार्या सारिका कुमारी समेत सभी शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे.

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