Seraikela Kharsawan News : ''''पर्यटन विकास के नाम पर वनों का हो रहा दोहन''''

Published by : AKASH Updated At : 09 Dec 2025 12:15 AM

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दलमा क्षेत्र ग्रामसभा सुरक्षा मंच ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

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चांडिल/ जमशेदपुर.

कोल्हान क्षेत्र दलमा अभ्यारण्य परिसर में प्रस्तावित 200 फीट लंबे ग्लास ब्रिज, रोपवे तथा अन्य पर्यटन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ग्रामसभाओं में नाराजगी है. दलमा क्षेत्र ग्रामसभा सुरक्षा मंच, कोल्हान ने कहा कि पर्यटन विकास के नाम पर वनों का दोहन किया जा रहा है. ग्रामसभा की सहमति के बिना कार्य शुरू करने के आदेश दिये गये हैं.

बिना ग्रामसभा की सहमति के किसी भी तरह का निर्माण कार्य अनुचित : सुकलाल

मंच के सचिव दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देने की आड़ में जंगलों की कटाई, पर्यावरणीय संरचनाओं को नुकसान और वनाधिकार कानून की अवहेलना कर रहा है. न तो ग्रामसभा से लिखित सहमति ली गयी, न ही परियोजना से जुड़े प्रभावों पर बातचीत की. अभ्यारण्य क्षेत्र आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर, जीविका और परंपरागत अधिकारों से जुड़ा है. ऐसे में बिना सहमति के किसी भी तरह का निर्माण कार्य उनके अधिकारों का हनन है. प्रस्तावित ग्लास ब्रिज और रोपवे परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों ने भी चिंता जतायी है.

उनका मानना है कि हजारों पर्यटकों की आवाजाही से वन्यजीव संरक्षण प्रभावित होगा और हाथियों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र में व्यवधान उत्पन्न होगा. दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया ने बताया कि भारी मशीनरी के उपयोग से पहाड़ी इलाके की संरचना प्रभावित होगी. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार लिखित आपत्ति देने के बावजूद विभाग कोई जवाब नहीं दे रहा है. विकास कार्यों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना वन विभाग की जिम्मेदारी है. लेकिन विभाग ऊपर से आदेश के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है. उन्होंने कहा कि ग्रामसभा सर्वोच्च इकाई है और उसके निर्णय की अनदेखी कानूनी रूप से भी अनुचित है. मंच ने चेतावनी दी है कि यदि परियोजनाओं को तुरंत रोका नहीं गया और ग्राम सभाओं के साथ औपचारिक वार्ता नहीं की गयी तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा. स्थानीय समुदायों का कहना है कि यदि पर्यटन विकास जरूरी है तो पहले पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (इआइए), सामाजिक सर्वे और ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए. हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी जमीन, जंगल और जीवन शैली की कीमत पर नहीं.

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