सरायकेला.
सरायकेला परिसदन में शनिवार को सिंह दिशोम देश परगना फकीर मोहन टुडू की अध्यक्षता में आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के सदस्यों की बैठक हुई. इसमें देश पारानिक बाबा नवीन मुर्मू, दुगनीपीड़ परगना दिवाकर सोरेन व इचापीड़ परगना सुंदर मोहन हेंब्रम उपस्थित थे. श्री टुडू ने कहा कि झारखंड सरकार ने राज्य के पारंपरिक ग्राम सभा का सम्मान करते हुए राज्य में पेसा कानून लागू किया है. पेसा कानून में कुछ संशोधन की आवश्यकता है. हम सरकार से पेसा कानून में संशोधन की मांग करते हैं. इसके लिए हमारा एक प्रतिनिधिमंडल बहुत जल्द राज्यपाल व मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नियमावली में संशोधन की मांग करेगा. जिले की सभी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, माझी परगना महाल व मानकी मुंडा ने सरकार का आभार प्रकट किया. मौके पर राजाराम हांसदा, बबलू मुर्मू, सुनील सोरेन, मदन बास्के, मुचरू हेंब्रम, सोमनाथ मुर्मू, गणेश गागराई, भरत सिंह मुंडा, सावन सोय मौजूद थे.आदिवासी स्वशासन व्यवस्था की मांग
पेसा कानून 1996 की धारा 4 “क ” से लेकर उप पारा तक का मौलिक अधिकार एवं मूलभावना को नष्ट न किया जाये.परंपरागत रूढ़ीजन्य विधि व पारंपरिक ग्राम स्वशासन के अगुवा को मजिस्ट्रेट का शक्ति प्रदान किया जाये.
पारंपरिक ग्राम सभा, रूढ़ीजन्य विधि पर प्रशासनिक शक्ति का उपयोग न करते हुए, कुछ मामलों पर पारंपरिक ग्राम सभा को पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था द्वारा स्वायत्त शासन का शक्ति प्रदान किया जाये. झारखंड पंचायती राज व्यवस्था द्वारा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था (ग्राम सभा) पर प्रभाव न डाला जाये. पारंपरिक ग्राम सभा का कार्यकारिणी बैठक व गठन की प्रक्रिया रूढ़ीजन्य विधि द्वारा किया जाये, इसमें उपायुक्त व अनुमंडल पदाधिकारी का कोई प्रभाव न हो.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

