चांडिल की ऐतिहासिक रथयात्रा 16 जुलाई को, तीन रथों पर मौसीबाड़ी जाएंगे महाप्रभु

Updated:
विज्ञापन
चांडिल की ऐतिहासिक रथयात्रा 16 जुलाई को, तीन रथों पर मौसीबाड़ी जाएंगे महाप्रभु

चांडिल स्थित श्री साधु मठिया दशनामी नागा सन्याशी आश्रम, जहां से निकलेगी प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा | Prabhat Khabar Network

चांडिल में 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली जाएगी. तीन अलग-अलग रथों पर सवार होकर प्रभु मौसीबाड़ी जाएंगे। जानें पूरी जानकारी.

विज्ञापन

शचिंद्र कुमार दाश / हिमांशु गोप

चांडिल. सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में इस वर्ष भी भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और परंपरागत वैभव के साथ 16 जुलाई को निकलेगी. चांडिल स्थित श्री साधु बांध मठिया दशनामी नागा संन्यासी आश्रम से स्टेशन रोड स्थित मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) तक निकलने वाली इस रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन अलग-अलग भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे.

इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए झारखंड के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. 14 जुलाई को भक्तों को होगा नवयौवन दर्शन रथयात्रा से पहले 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का नवयौवन (नवजीवन) दर्शन कराया जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार देवस्नान पूर्णिमा के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और 14 दिनों तक एकांतवास में रहकर औषधीय उपचार ग्रहण करते हैं.

इसके बाद नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं. इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, आरती और महाप्रसाद वितरण का आयोजन होगा. तीन रथों पर निकलेंगे भगवान 16 जुलाई को सबसे आगे नंदीघोष रथ पर भगवान जगन्नाथ, बीच में देवदलन रथ पर देवी सुभद्रा और तालध्वज रथ पर भगवान बलभद्र विराजमान होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे. श्रद्धालु रस्सियां खींचकर रथों को गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाएंगे. यह दृश्य चांडिल की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान माना जाता है.

नागा संन्यासियों की परंपरा बनाती है रथयात्रा को विशेष चांडिल की रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका आयोजन दशनामी नागा संन्यासी आश्रम द्वारा किया जाता है. अंग्रेजी शासनकाल में यहां एक ही रथ पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की यात्रा निकाली जाती थी. वर्ष 1980 में ब्रह्मलीन महंत परमानंद सरस्वती ने जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर तीन अलग-अलग रथों की परंपरा शुरू की.

वर्तमान में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत विद्यानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में यह परंपरा और अधिक भव्य स्वरूप ले चुकी है. रथों के रंग-रोगन और मरम्मत का कार्य अंतिम चरण में श्री साधु बांध मठिया दशनामी नागा संन्यासी आश्रम में रथों की मरम्मत, रंग-रोगन और सजावट का कार्य तेज गति से चल रहा है. श्रद्धालुओं के स्वागत और धार्मिक अनुष्ठानों की भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं.

हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के रथ खींचने की संभावना है. महंत ने श्रद्धालुओं से की भागीदारी की अपील आश्रम के महंत इंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि रथयात्रा की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. 14 जुलाई को नवयौवन दर्शन एवं विशेष पूजा-अर्चना होगी, जबकि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी. उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की.


विज्ञापन
Sachindra Dash

लेखक के बारे में

By Sachindra Dash

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola