Saraikela: सरहुल महोत्सव में शामिल हुए अर्जुन मुंडा, कहा- जंगल की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी

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सरहुल महोत्सव में अपने विचार रखते पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा

Saraikela: सरायकेला खरसावां जिला के कुकडू प्रखंड में आयोजित सरहुल महोत्सव में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि जंगल और प्रकृति की रक्षा करना केवल आदिवासियों की नहीं, बल्कि हर किसी की जिम्मेदारी है. सरहुल प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है.

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हिमांशु गोप
Saraikela: सरायकेला खरसावां जिला के कुकडू प्रखंड अंतर्गत डाटम गांव में सोमवार को पारंपरिक आस्था और उल्लास के साथ सरहुल महोत्सव मनाया गया. इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सरहुल पूजा की सभी रस्में निभाई गईं. साल के पेड़ की डाली स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई और प्रकृति, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ राज्य एवं देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई. महोत्सव में शामिल लोगों ने पारंपरिक रूप से अपने कानों में सरई (सखुआ) फूल लगाकर सरखोसी की. कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी शामिल हुए और उन्होंने भी पारंपरिक रीति का पालन किया.

भाईचारे को मजबूत करता है सरहुल

पूरे परिसर में पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य से उत्सवी माहौल बना रहा. इस दौरान राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि सरहुल महोत्सव प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं के प्रति आस्था और सम्मान का जीवंत प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह पर्व आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को संजोने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक सद्भाव का संदेश देता है. उन्होंने आगे कहा कि आज विश्व जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे समय में सरहुल जैसे पारंपरिक पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की सीख देते हैं. यह पर्व समाज में एकता, सहयोग और भाईचारे को मजबूत करता है और जल, जंगल और जमीन की रक्षा के प्रति सभी को जागरूक करता है.

सरहुल प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक

उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि हमारी जनजातीय परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक है. यह पर्व समाज में पारंपरिक सद्भाव, सहयोग और एकता को मजबूत करता है और हमें अपनी संस्कृति जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है. श्री मुंडा ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना केवल आदिवासी समाज की ही नहीं बल्कि पूरे समाज और मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी है. प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की हमारी पारंपरिक संस्कृति और वैश्विक पर्यावरण संकट के समाधान की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है.

इस अवसर पर ईचागढ़ के विधायक सविता महतो, आदित्यपुर के मेयर संजय सिंह सरदार, भाजपा नेत्री सारथी महतो, झामुमो के केंद्रीय सदस्य काबलू महतो, भाजपा नेता पप्पू वर्मा, खुदी सिंह सरदार, बांकेश्वर सिंह मुंडा, अजीत सिंह मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, रामलाल सिंह मुंडा, गोराचंद सिंह मुंडा, उमेश सिंह मुंडा आदि उपस्थित थे.

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अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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