तीन साल बाद जगी पेंशन की आस

Updated at : 04 Dec 2013 3:09 AM (IST)
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तीन साल बाद जगी पेंशन की आस

– मनोज कुमार – चाईबासा : नि:शक्तों के दर्द को प्रशासनिक अधिकारी किस तरह बोझिल बना देते है इसका एक उदाहरण मात्र है सोनुवा का देबावीर निवासी सोमाबान. वर्ष 2010 में सोमाबान को मिलने वाला विकलांब पेंशन बंद कर दिया गया. पेंशन के लिए काफी दौड़ लगायी पर पेंशन नहीं शुरू हुआ. अफसरों की मानवीय […]

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– मनोज कुमार –

चाईबासा : नि:शक्तों के दर्द को प्रशासनिक अधिकारी किस तरह बोझिल बना देते है इसका एक उदाहरण मात्र है सोनुवा का देबावीर निवासी सोमाबान. वर्ष 2010 में सोमाबान को मिलने वाला विकलांब पेंशन बंद कर दिया गया. पेंशन के लिए काफी दौड़ लगायी पर पेंशन नहीं शुरू हुआ.

अफसरों की मानवीय संवेदना नहीं जागी. केसीसी के लिए चार बार आवेदन दिया, पर स्वीकृति नहीं मिली. बीपीएल सूची में भी उसका नाम दर्ज नहीं है.

मंगलवार को नि:शक्तता दिवस पर सोमाबान जब डीसी अबुबक्कर सिद्दीख के सामने आया तो ऑन द स्पॉट उसकी समस्या का निराकरण हो गया. इस मौके पर डीसी ने कहा कि प्रशासन द्वारा ऐसे लोगों को सहायता देने में की जा रही लापरवाही को दूर करके ही नि:शक्तता दिवस की प्रासंगिकता को बनाये रखा जा सकता है. डीसी के आदेश पर सोमाबिन सिंह को ट्राइसाइकिल मिला तो केसीसी, बंद पेंशन के अलावा बीपीएल सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो सकी.

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