घर पहुंचे प्रभु जगन्नाथ

Updated at : 08 Jul 2014 5:30 AM (IST)
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घर पहुंचे प्रभु जगन्नाथ

खरसावां : धार्मिक नगरी खरसावां में भक्तों के समागम, जय जगन्नाथ की जयघोष, शंखध्वनी व पारंपरिक हुल-हुली के बीच सोमवार को भाई-बहन के साथ प्रभु जगन्नाथ अपने मौसी के घर गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर लौट आये. इसी के साथ ही श्रद्धा व उल्लास के साथ इस वर्ष का रथ यात्रा उत्सव संपन्न हो गया. शाम […]

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खरसावां : धार्मिक नगरी खरसावां में भक्तों के समागम, जय जगन्नाथ की जयघोष, शंखध्वनी व पारंपरिक हुल-हुली के बीच सोमवार को भाई-बहन के साथ प्रभु जगन्नाथ अपने मौसी के घर गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर लौट आये. इसी के साथ ही श्रद्धा व उल्लास के साथ इस वर्ष का रथ यात्रा उत्सव संपन्न हो गया.

शाम करीब चार बजे पुरोहितों द्वारा प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के प्रतिमाओं को गुंडिचा मंदिर से बाहर निकाल कर रथ पर चढ़ाया गया. इसके पश्चात सैड़कों भक्तों ने रथ को मौसीबाड़ी से खिंच कर श्री मंदिर तक पहुंचाया. इस दौरान भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में लड्डओं की बरसात होती रही. हर कोई प्रसाद पा कर व रथ को खिंच कर स्वयं को धन्य समझ रहा था. श्री जगन्नाथ के वासपी रथ यात्रा को बाहुड़ा यात्रा कहा जाता है. प्रभु आठ दिनों तक मौसी के घर में रहने के बाद श्रीमंदिर वापस लौटे. इसके अलावा खरसावां, हरिभंजा, दलाईकेला, गालुडीह, बंदालौहर, चाकड़ी, मुंडादेव, सीनी में भी बाहुड़ा रथ यात्रा शांति पूर्वक संपन्न हो गया.

तीनों विग्रहों को रथ से श्री मंदिर पहुंचाया गया. बाहुड़ा यात्रा पर प्रभु जगन्नाथ का भव्य श्रंगार किया गया. श्रीमंदिर पहुंचने पर तीनो विग्रहों की आरती उतारी गयी तथा भोग लगाया गया. भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया. हरिभंजा में रथ से भक्तों के बीच प्रसाद के रुप में कटहल फेंका गया. बाहुड़ा यात्रा के साथ आस्था, मान्यता व परंपराओं का त्योहार रथ यात्रा का समापन हो गया. अब श्रीमंदिर में ही अगले एक साल तक प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा की पूजा अर्चना नीति नियम के साथ की जायेगी.

सीनी में भी निकला रथ

सीनी. प्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन शुभद्रा अपने मौसी घर में विश्रम के पश्चात अपने आवास को पुन: लौट आये. मौसीबाड़ी में विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना के पश्चात भक्तों ने रथ पर बैठाकर प्रभु को वापस लाया. प्रभु मौसीबाड़ी से पुन: अपने बंगाली क्लब स्थित मंदिर पर लौटे. मंदिर में पहुंचने के पश्चात पुन: पूजा अर्चना के बाद मंदिर में स्थापित किया गया. अंत में उपस्थित भक्तों के लिए लंगर की व्यवस्था की गयी. जिसमें समस्त भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया.

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