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बरहरवा में घर-घर पानी का सपना अधूरा, मेंटनेंस के अभाव में 15 महीनों से नहीं मिल रहा पानी

Updated at : 14 Jan 2026 8:04 PM (IST)
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बरहरवा में घर-घर पानी का सपना अधूरा, मेंटनेंस के अभाव में 15 महीनों से नहीं मिल रहा पानी

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में जलापूर्ति योजना की दी थी स्वीकृति,

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बरहरवा

शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में जलापूर्ति योजना की स्वीकृति दी थी. योजना का उद्देश्य घर-घर तक पेयजल पहुंचाना था. इस योजना में बरहरवा व पतना के छह गांवों को जोड़ना था. उस समय 1,011 घरों को जोड़े जाने का लक्ष्य रखा गया था, जिस समय योजना पर काम चल रहा था, उस समय इसमें 2,365 घरों को जोड़ा भी गया. उस समय लोगों को लगा कि अब पानी के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा. लेकिन, ऐसा कुछ हुआ नहीं. इस योजना के लिए राज्य सरकार ने 9 करोड़ 19 लाख 82 हजार रुपये की स्वीकृति दी थी, लेकिन, अब भी यह योजना अधर में अटकी हुई है. मेंटेनेंस के अभाव में बीते 15 महीनों से योजना बंद है.

नगर पंचायत बरहरवा नहीं लेना चाहती हैंडओवर

सूत्रों के अनुसार, विभाग लंबे समय से नगर पंचायत बरहरवा को योजना हैंडओवर किये जाने का प्रयास कर रहा है. लेकिन, नपं अधूरी योजना को हैंडओवर लेने के मूड में नहीं है. इस परिस्थिति में इतनी भारी रकम खर्च होने के बाद भी इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है.

कई इलाकों में बिछा है पाइपलाइन

जानकारी के अनुसार, योजना के तहत बरहरवा के चार व पतना प्रखंड के दो पंचायतों के आधे दर्जन से अधिक गांवों में पानी पहुंचाया जाना था. इसके लिए कई गांवों में पाइपलाइन बिछाया गया है. योजना के तहत बरहरवा पूर्वी के 613, बरहरवा पश्चिमी के 870, झिकटिया के 126, रतनपुर के 576 सहित पतना प्रखंड के कई गांवों में पाइपलाइन बिछाकर घरों में पानी का कनेक्शन दिया गया है. बरहरवा पूर्वी क्षेत्र में भी पाइपलाइन बिछाया गया था, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण वहां जलापूर्ति नहीं संभव नहीं हो पाया है.

8 करोड़ से अधिक की हो गयी है रुपये की निकासी

बरहरवा जलापूर्ति योजना की स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2015-16 में दी गयी थी. विभाग की ओर से इस योजना को पूरा करने की संभावित तारीख 30 नवंबर 2019 निर्धारित की गयी थी, लेकिन, विभागीय वेबसाइट में इस योजना को सितंबर 2022 में किया गया. इस योजना के लिए 919. 82 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी थी. योजना के पूरा होते-होते तीन वित्तीय वर्षों में 822.80 लाख रुपये खर्च हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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